Wednesday, October 5, 2022
HomeBreaking NewsUP के जिस स्कूल की थाली की हर तरफ है चर्चा, वो...

UP के जिस स्कूल की थाली की हर तरफ है चर्चा, वो पूरे देश को स्मार्ट पढ़ाई का रास्ता भी सिखा सकता है – Up malakpura school delicious food add on mid day meal smart class computer lab and other facility also available ntc

के एक सरकारी स्कूल की मिड डे मील की थाली देशभर में खूब चर्चा है. पनीर की सब्जी, , फल में सेब, , सेक और थाली की शोभा बढ़ा रहे हैं. , ये थाली यूपी के जालौन के गांव में 31 अगस्त को एड ऑन मिड डे मील के तहत परोसी गई. सरकारी स्कूल खास थाली सिर्फ है, शिक्षा स्तर में के ऐसे उठाए गए हैं, जो इसे किसी अच्छे की श्रेणी में खड़ा हैं. मलकपुरा गांव में स्कूल के बच्चों के लिए कंप्यूटर लैब, स्मार्ट क्लास, फ्री ट्यूशन जैसी व्यवस्थाएं गांव में ही की गई हैं.

शिक्षा की दिशा में हुए इन क्रांतिकारी बदलावों के पीछे के ग्राम प्रधान अमित की सोच है. तक से खास बातचीत में अमित ने बताया कि कैसे उनके एक सरकारी स्कूल में सीमित संसाधनों के साथ ये कदम उठाना संभव हो पाया. उन्होंने बच्चे के हाथ में दिख रही खूबसूरत मिड डे की थाली भी राज खोला.

या एड ऑन मिड डे मील

अमित बताते हैं कि उन्हें बच्चों के लिए अच्छे खाने का आईडिया पिछले साल 31 दिसंबर को आया था. उन्होंने बच्चों की डिमांड पर स्कूल में मिड डे मील में की सब्जी बनवाई थी. मिड डे मील के बजट में यह संभव नहीं है कि रोज इस तरह का खाना बनवाया जा सके. अमित व्यक्तिगत तौर पर कदम उठा सकते थे, इसमें अतिरिक्त खर्चा भी पड़ता है. अमित ने कोरोना काल के बाद जब स्कूल खुले तो दिशा में करना शुरू किया.

स्कूल में एक महीने में कम से कम 2 बार और ज्यादा से ज्यादा 4 बार तिथि भोजन के तहत स्पेशल खाना खिलाया जाता है.

हैं कि उनके सामने दो परेशानियां थीं. पहली कि इस तरह के तेल ज्यादा होता है, में इस का खाना रोज नहीं बनवाया सकता. लिए उन्होंने महीने में कम से कम दो बार और ज्यादा ज्यादा महीने में चार बार बच्चों के लिए ऐसा खाना बनवाने का विचार किया. परेशानी थी कि इसके लिए फंड कहां से आता. सोशल मीडिया पर लोगों इस व्यवस्था में जुड़ने की अपील की.

See also  नैतिक शिक्षा परीक्षा में 107500 विद्यार्थी हुए शामिल - guru gobind singhstudy circle

जाता है खाने का प्रबंध?

अपील लोग आए. से किया. अपने बच्चों के बर्थडे या अन्य किसी शुभ मौकों पर बच्चों के लिए इस तरह के की व्यवस्था कराने लिए कहते हैं. कोई भी इस रेंडम व्यवस्था अपना सहयोग दे है. मुताबिक, स्कूल में करीब 117 हैं. ऐसे में 100-115 के लिए स्पेशल खाने पर 2000-4000 रुपए का खर्चा आता है. ऑन मिड डे मील होता है. डे मील की व्यवस्था में इस अतिरिक्त खर्चे को जोड़कर के लिए अच्छा भोजन कराया जाता है. 31 अगस्त की जो फोटो वायरल हुई, उसका प्रबंध कानपुर के रहने वाले सौरभ शुक्ला ने कराया. हैं उन्हें एड ऑन मिड डे मील का आईडिया गुजरात के तिथि योजना से आया.

भी व्यक्ति अपनी स्वेच्छा से भोजन की करा सकता है.

स्कूलों में क्या ऐसी व्यवस्था संभव है?

इस सवाल के जवाब में ग्राम प्रधान अमित ने बताया, तौर पर तरह के कदम उठाने से बचते हैं. शिकायत या विभागीय कार्यवाई का डर लगता है. चूंकि वे एक प्रतिनिधि हैं और गांव के लोगों द्वारा चुनकर बने हैं, इस तरह का कदम उठाने पर विचार पाए. बताया कि उन्होंने इसके स्कूल प्रबंधन से प्रस्ताव पास कराया है. इसमें किसी तरह की कोई कानूनी अड़चन नहीं है.

अमित के मुताबिक, हर महीने में कम से कम दो बार बच्चों के लिए ऐसी व्यवस्था आसानी से हो जाती है. रेंडम है. ऐसे में इसका लाभ ये मिला है कि जहां पहले स्कूल में 60-70 आते थे, अब हर रोज स्कूल में 90% बच्चे आ रहे हैं. अलावा बच्चों में कुपोषण की को भी किया जा सकेगा.

-प्रधान .

बच्चों के लिए गांव में स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब और कूलर जैसी व्यवस्थाएं

शिक्षा व्यवस्था को बेहतर के लिए तमाम कदम उठाए गए हैं. बच्चों के लिए स्मार्ट क्लास, लैब है. बच्चों को फ्री ट्यूशन की व्यवस्था कराई गई है. के करीब 18-20 बच्चे हर रोज ट्यूशन पढ़ते हैं. स्कूल में 6 कमरे हैं, हर कमरे में एक कूलर लगवाया गया है. अलावा अमित हफ्ते में एक खुद पढ़ाने भी हैं. स्कूल के विषयों से किसी अन्य विषय पर जानकारी देते हैं. ने बताया कि उन्होंने प्रधान चुनाव के अपने घोषणा पत्र में वादा किया था कि वे शिक्षा पर विशेष काम करेंगे. में वे अपना वादा के लिए हरसंभव कदम उठा रहे हैं.

See also  सुप्रीम कोर्ट ने BCCI को संविधान संशोधन की मंजूरी दी, अब दोनों 6 साल तक पदाधिकारी रह सकेंगे | Sourav Ganguly Jay Shah Hearing Update; Supreme Court On Cooling-off Period

के मुताबिक, बच्चों को स्मार्ट क्लास में लगे प्रोजेक्टर के माध्यम से अलावा शनिवार को विशेष फिल्म दिखाई जाती है. फिल्में किसी महापुरुष के जीवन, किसी स्वतंत्रता सेनानी या जैसे अहम आधारित होती हैं. बताते हैं कि हाल ही में जब देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति द्रोपदी ने , भी बच्चों को लाइव दिखाया गया. यह भी बताया गया कि कैसे एक छोटे से आदिवासी की महिला मुकाम तक पहुंची. में सीमित जगह और चोरी जैसी समस्याओं को देखते हुए स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब को गांव में खाली पड़े घर में बनवाया गया है.

माध्यम से राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू का शपथ ग्रहण कार्यक्रम देखते बच्चे

और गोला भी फेंक रहे

प्रधान अमित के मुताबिक, उन्होंने स्कूल में एक खेल बनाने की दिशा में कदम आगे बढ़ाया है. का काम भी शुरू हो गया है. बच्चों के लिए भाला फेंक और गोला फेंक समेत तमाम के सामानों की व्यवस्था की गई है. अमित का लक्ष्य है कि उनके 5 साल के कार्यकाल में कम से कम 1 बच्चा जिला स्तर या राज्य स्तर पर एथलीट खेलों में आगे आए.

में बच्चे.

नीति लागू करने वाला राज्य का पहला स्कूल

के मुताबिक, सरकारी स्कूल उत्तर प्रदेश का संभवता पहला सरकारी स्कूल है, जहां नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया गया है. , तौर है. इसमें कई ऐसे प्रावधान हैं, जिन्हें लेकर राज्य सरकार को कदम उठाना है.

आंशिक तौर पर नई शिक्षा नीति की गई लागू.

हैं कि उन्होंने बच्चों लिए टूर कराने की योजना बनाई है. पंचायत . अलावा बच्चों को लाने के लिए ई रिक्शा, शनिवार को नो बैग डे जैसे प्रावधान लागू किए हैं. शनिवार को बच्चों को ऑनलाइन या ऑफलाइन किसी खास व्यक्ति से मुलाकात कराई जाती है. तमाम मुद्दों पर जानकारी हासिल कर सकें.

See also  James Pattinson ends Victoria career as retirement looms
में बच्चे

नहीं अमित ने केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा संचालित विद्यांजलि में भी देश का रजिस्ट्रेशन कराया है. वाला यह राज्य का पहला स्कूल है. योजना के तहत भारत में रहने वाला या देश से बाहर का कोई व्यक्ति बच्चों को पढ़ाने में सहयोग दे सकता है. समयानुसार स्कूल में बच्चों को पढ़ा सकता है. अलावा स्कूलों में संसाधन जैसे कमरा बनवाना, कंप्यूटर या शिक्षा के स्तर बढ़ाने मददगार उपकरण दान में दे सकता है.

ट्यूशन में करीब 18-20 बच्चे हर रोज पढ़ने हैं.

में इन संसाधनों को जुटाने के लिए फंड कहां से आया?

स्कूल में प्राइवेट जैसी सुविधाओं को देखकर एक सवाल सबके मन में आता है कि आखिर व्यवस्थाओं के लिए कहां से आया. बताते हैं कि उन्होंने इसके कई संसाधनों इस्तेमाल किया है. बताया कि स्कूल क्राउड , से मदद, ग्राम निधि, विद्यालय निधि और मनरोगा द्वारा इन कामों को . बताते हैं कि विद्यालय में कूलर लगवाने के लिए उन्होंने सोशल पर मदद मांगी थी. उनकी अपील के सिर्फ 20 घंटे में उन्होंने 6 कूलर लगवाने के लिए रकम जुटा ली थी.

बच्चों को विज्ञान विषय के बारे में पढ़ाते ग्राम प्रधान अमित (हफ्ते में एक क्लास लेते हैं)

अमित के मुताबिक, मीडिया चैनल पर स्कूल में हो रहे कामों को लेकर अमेरिका में उनसे संपर्क और स्कूल दो कंप्यूटर लगवाने की पेशकश की. उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति ने नाम न बताने की शर्त पर स्कूल में 20 हजार रुपए का प्रोजेक्टर लगवा दिया. , स्कूल में बच्चों के अतिरिक्त के लिए NGO ने मदद की है.

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments