Sunday, November 27, 2022
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Survey Team Reached In Nadwa College In Lucknow. – Lucknow : टीम ने किया दारुल उलूम नदवा का सर्वे, देश के सबसे बड़े मदरसों में है शामिल

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सर्वे की टीम ने बृहस्पतिवार को दारुल उलूम नदवा पहुंचकर इसका सर्वे किया। टीम में एसडीएम नवीन कुमार, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सोन कुमार, खंड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय राजेश सिंह शामिल थे। प्रदेश में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे करने के लिए सरकार ने 11 बिंदु तय किए हैं।

सर्वे टीम ने नदवा प्रबंध के सदस्य मौलाना भोला, . शुएब कुरैशी, नदवा के उप प्रधानाचार्य मौलाना अब्दुल अजीज भटकली और नदवा सचिव के सलाहकार मौलाना कमाल अख्तर नदवी से सभी 11 बिंदुओं पर जानकारी ली और कागजात एकत्र किए। बाद सर्वे टीम ने कक्षाओं का निरीक्षण और लाइब्रेरी का भी दौरा किया। और डीएमओ ने बताया कि सभी बिंदुओं पर जिम्मेदारों ने जानकारी देने के साथ ही कागजात भी मुहैया करा दिए हैं। कुमार ने बताया कि यहां क्लासरूम काफी बड़े हैं और छात्रों की संख्या भी ठीक है।

तक एनसीईआरटी के मुताबिक शिक्षा
के सलाहकार मौलाना कमाल अख्तर नदवी ने टीम को बताया कि करीब 124 साल पुराना दारुल उलूम नदवतुल उलमा कौम के चंदे से संचालित होता है। यहां इस्लामी शिक्षा के साथ आलिम स्तर तक एनसीईआरटी के मुताबिक शिक्षा दी जा रही है। अंग्रेजी पर खास जोर दिया जाता है।

2410 को 81 देते हैं तालीम
ने बताया कि नदवा को लखनऊ विश्वविद्यालय और जामिया मिल्लिया इस्लामिया इंटर तक की मान्यता देता है। मुस्लिम विश्वविद्यालय स्नातक की मान्यता देता है। बताया कि यहां 11 छात्रावास और 40 क्लासरूम बने हैं। वर्तमान समय में नदवा में 2410 छात्रों को 81 शिक्षक तालीम दे रहे हैं। कौम के चंदे से किया जा रहा है। रूप से इस्लामी शिक्षा दी जाती है।

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मदरसा बोर्ड के चेयरमैन बोले- सर्वे को जांच न समझा जाए
प्राप्त मदरसों के सर्वे को लेकर बन रही भ्रम की पर मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. जावेद ने सफाई दी है। कहा कि गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वे को किसी भी रूप में जांच न समझा जाए। का का मकसद मदरसों सही संख्या का पता लगाना है, जिससे जरूरत पड़ने पर उनको सुविधाएं दी जा सकें। . ने कहा कि प्रदेश में अधिकांश मदरसे चंदे व जकात के पैसे से चल रहे हैं। मदरसे गरीब, लाचार और यतीम बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मदरसों के बच्चों के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा साफ है। चाहते हैं कि इन बच्चों के एक हाथ में कुरान और दूसरे में कंप्यूटर होना चाहिए।

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सर्वे की टीम ने बृहस्पतिवार को दारुल उलूम नदवा पहुंचकर इसका सर्वे किया। टीम में एसडीएम नवीन कुमार, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सोन कुमार, खंड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय राजेश सिंह शामिल थे। प्रदेश में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे करने के लिए सरकार ने 11 बिंदु तय किए हैं।

सर्वे टीम ने नदवा प्रबंध के सदस्य मौलाना भोला, . शुएब कुरैशी, नदवा के उप प्रधानाचार्य मौलाना अब्दुल अजीज भटकली और नदवा सचिव के सलाहकार मौलाना कमाल अख्तर नदवी से सभी 11 बिंदुओं पर जानकारी ली और कागजात एकत्र किए। बाद सर्वे टीम ने कक्षाओं का निरीक्षण और लाइब्रेरी का भी दौरा किया। और डीएमओ ने बताया कि सभी बिंदुओं पर जिम्मेदारों ने जानकारी देने के साथ ही कागजात भी मुहैया करा दिए हैं। कुमार ने बताया कि यहां क्लासरूम काफी बड़े हैं और छात्रों की संख्या भी ठीक है।

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तक एनसीईआरटी के मुताबिक शिक्षा

के सलाहकार मौलाना कमाल अख्तर नदवी ने टीम को बताया कि करीब 124 साल पुराना दारुल उलूम नदवतुल उलमा कौम के चंदे से संचालित होता है। यहां इस्लामी शिक्षा के साथ आलिम स्तर तक एनसीईआरटी के मुताबिक शिक्षा दी जा रही है। अंग्रेजी पर खास जोर दिया जाता है।

2410 को 81 देते हैं तालीम

ने बताया कि नदवा को लखनऊ विश्वविद्यालय और जामिया मिल्लिया इस्लामिया इंटर तक की मान्यता देता है। मुस्लिम विश्वविद्यालय स्नातक की मान्यता देता है। बताया कि यहां 11 छात्रावास और 40 क्लासरूम बने हैं। वर्तमान समय में नदवा में 2410 छात्रों को 81 शिक्षक तालीम दे रहे हैं। कौम के चंदे से किया जा रहा है। रूप से इस्लामी शिक्षा दी जाती है।

मदरसा बोर्ड के चेयरमैन बोले- सर्वे को जांच न समझा जाए

प्राप्त मदरसों के सर्वे को लेकर बन रही भ्रम की पर मदरसा के चेयरमैन डॉ. जावेद ने सफाई दी है। कहा कि गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वे को किसी भी रूप में जांच न समझा जाए। का का मकसद मदरसों सही संख्या का पता लगाना है, जिससे जरूरत पड़ने पर उनको सुविधाएं दी जा सकें। . ने कहा कि प्रदेश में अधिकांश मदरसे चंदे व जकात के पैसे से चल रहे हैं। मदरसे गरीब, लाचार और यतीम बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मदरसों के बच्चों के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा साफ है। चाहते हैं कि इन बच्चों के एक हाथ में कुरान और दूसरे में कंप्यूटर होना चाहिए।

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