Wednesday, November 30, 2022
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Supreme Court Hearing On Hijab Issue – जजों को धर्म के मामलों में न्यायविद नहीं बनना चाहिए : हिजाब मामले पर SC में सुनवाई के दौरान हुई जबरदस्त बहस

सोंधी- एक छात्रा को सिर्फ इसलिए कि वह है, एक कक्षा के अंदर अनुमति न देना भी अनुच्छेद (राज्य जाति, लिंग, धर्म के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं करेगा ). सोंधी ने डॉ अम्बेडकर का हवाला कि बिना नौकरियों चुनने के लिए मजबूर किया जा सकता है. को मौलिक अधिकारों को छोड़ने लिए मजबूर किया है.

– . उद्धरण यहां कैसे प्रासंगिक है?

: नागरिक पर दो अधिकारों में से किसी एक का बोझ नहीं होना चाहिए. स्थिति है जिसका सामना लड़कियां कर रही हैं.
आदित्य सोंधी ने कहा – यह मामला भारत के लिए स्थायी के लिए महिलाओं के अधिकार से संबंधित था. उस संदर्भ में माना कि जो और तटस्थ प्रतीत होता है, उसका अप्रत्यक्ष रूप से एक और कोर्ट द्वारा इसका विरोध जाएगा . में मेरे ऐसी दोस्त हैं, कभी हिजाब पहना. यह अंततः व्यक्तिगत पसंद का मामला , लेकिन यहां हम उन छात्रों के काम कर रहे हैं, जो शायद परिवार में पहले शिक्षार्थी हों. हमें सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखना होगा.

-वकील सोंधी ने अमेरिका के फैसले का उदाहरण हुए कहा कि राज्य सरकार हित में के धार्मिक मामले में चाहिए. अंतर-धार्मिक मतभेद हो सकते हैं, इसलिए तथ्य यह है कि कुछ लड़कियां पहनने का विकल्प चुनती हैं, यह बात अलग है.

– सोंधी- वास्तव में, कई लड़कियों को चुनाव करने के लिए किया गया है, और उन्हें शिक्षा से कर दिया गया है.

– सोंधी ने नाइजीरिया के सुप्रीम कोर्ट के फैसले कुछ अंश , कहा गया है कि कुरान की गया है कि महिला मुसलमानों अपने सिर को ढंकना चाहिए.

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राजीव धवन ने बहस शुरू की

– : प्रथाओं पर, केरल हाईकोर्ट और कर्नाटक हाईकोर्ट के बीच मतभेद है. इसे है.

– हिजाब पहनने वाले व्यक्ति के साथ धर्म और लिंग के भेदभाव नहीं किया जा सकता है.
– का अधिकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है.
– अधिकार है
– हिजाब पहनने वाले व्यक्ति के साथ धर्म और लिंग के भेदभाव नहीं किया जा सकता है.
– जब तक हम इस मामले को उसके सही परिप्रेक्ष्य में नहीं रखते.
– हम जानते हैं कि आज कुछ भी इस्लाम के रूप में आता है, खारिज करने के लिए बहुसंख्यक समुदाय में बहुत असंतोष है.
– हम देख सकते हैं कि गौ हत्या मामले में, अब 500 पूजा स्थलों मामले दाखिल किए गए हैं.
-जस्टिस गुप्ता: आपको तथ्यों पर टिके रहना चाहिए
– – भेदभाव पर हूं.

ने कहा कि दुनिया भर हिजाब को माना जाता है. के में है. को है. और धार्मिक अधिकारों पर फैसला करने का मामला है. पूछा क्या ऐसा सिर्फ स्कूल में हो रहा है?

धवन ने कहा- इसकी व्याख्या यह है कि यह परेशानी हर जगह हो रही है, पूरे भारत में..
ने कहा – यहां मसला ड्रेस कोड के जरिये स्कूल में अनुशासन का नहीं है.
कर्नाटक HC के फैसले के बाद अखबारों में लिखा गया कि हिजाब पर बैन लगाया गया न कि ड्रेस कोड बरकरार रखा गया.

कोर्ट- अखबार जो लिखते नहीं है, वो कोर्ट की सुनवाई का विषय नहीं है
धवन -अखबार जो लिखते है, उससे पता चलता है कि आखिर असल मुद्दा क्या है. स्कूल में अनुशासन का विषय नहीं है.

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: विवाद डेवलपमेंट कमिटी की वजह से बढ़ा.
के साथ मारपीट की गई उनके साथ भेदभाव गया. यही . भी गार्जियन से मिलने से इनकार कर दिया.
के अभ्यास पर धवन
हम जो नहीं चाहते हैं, वह यह है कि अदालत धर्म हाई प्रीस्ट ना बने
बने और तय करें कि कानून क्या है

गुप्ता – अगर हम तय नहीं करेंगे तो कौन फैसला करेगा?
– अगर कोई मुद्दा आता है, तो कौन-सा मंच तय करेगा?
– कोई विवाद उत्पन्न होता है तो कौन फैसला करेगा ?

: विवाद है
– एक है.
– यदि पूरे भारत में हिजाब का अभ्यास किया जाता है तो अदालत केवल यह देखेगी क्या यह एक वास्तविक प्रथा है.

: कोई काम किसी आस्था के सिद्धांतों अनुसार किया जाता है, और प्रामाणिक है..तो हमें यह होगा कि यह प्रथा या नहीं, और यह प्रथा दुर्भावनापूर्ण नहीं है.
– जजों को धर्म मामलों में न्यायविद नहीं चाहिए.
– किसी भी बाहरी प्राधिकरण को यह कहने का कोई अधिकार कि ये धर्म के आवश्यक अंग नहीं है.
– यह राज्य के धर्मनिरपेक्ष प्राधिकरण के लिए प्रशासन की आड़ में उन्हें किसी तरह प्रतिबंधित करने के लिए खुला नहीं है.

ने राजीव धवन से पूछा क्या हिजाब इस्लाम मे एसेंशियल प्रैक्टिस है?
धवन ने कहा कि हिजाब देश में पहना है. में एक उचित स्वीकार्य प्रैक्टिस है बिजॉय एमेनुएल मामले में कोर्ट तय किया था कि कि कोई है तो उसे इजाजत दी जा सकती है.
धवन- दरअसल ये मामला हिजाब के खिलाफ अभियान को लेकर रहे कैंपेन को लेकर है.
– आदेश का कोई आधार नहीं है
– ये मुसलमानों विशेष तौर पर मुस्लिम महिलाओं को निशाना बनाने के लिए है
– दलीलें पूरी

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ओर से हुजेफा अहमदी
– हित क्या है?
– वैध राज्य हित शिक्षा को प्रोत्साहित करने में है, खासकर नाबालिगों के बीच
– उसका हित ऐसी नीति बनाने में नहीं है जिसमें बच्चों को स्कूल छोड़ना पड़े

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