Wednesday, October 5, 2022
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National Logistics Policy Started By PM Modi Today Know All About What It Is And Who Will Get Benefit

National logistics policy: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने अपने जन्मदिवस पर एक बड़ी सौगात दी है. पीएम ने नई राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (National logistics policy) का शुभारंभ किया, जो कारोबार जगत के लिए मील का पत्थर साबित होगी. ने इस पॉलिसी की शुरुआत करते हुए इसकी खूबियां गिनाईं और अपने संबोधन में विकास की बढ़ते भारत को यह नीति एक देगी. दुनिया अब भारत को नए रूप में देख रही है और स्वीकार कर रही है. पॉलिसी के लागू होने के बाद कारोबार जगत को बहुत बड़ा होगा जो निचले स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक आत्मनिर्भर भारत को नई उड़ान देगा.

क्या फायदा

राष्ट्रीय रसद नीति के लागू होने के बाद कोविड से प्रभावित व्यवस्था को रफ्तार मिलेगी. सामानों की सप्लाई में आने वाली समस्याओं को करने में मदद मिलेगी और ही माल ढुलाई में ईंधन खपत को कम करने की दिशा में भी फायदा होगा. भारत में लॉजिस्टिक्स यानी माल ढुलाई के ज्यादातर सड़क, बाद जल फिर हवाई मार्ग का इस्तेमाल किया जाता है.

भारत अपनी जीडीपी का लगभग 13 से 14 प्रतिशत हिस्सा लॉजिस्टिक्स यानी माल ढुलाई पर कर देता है जबकि जर्मनी जापान जैसे देश इसी के लिए 8 से 9 फीसदी ही खर्च करते हैं. के लागू होने से लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को भी मजबूती मिलेगी इस पर खर्च भी कम हो जाएगा.

है लॉजिस्टिक यानी माल ढुलाई

भारत में दूर-दराज गांवों-कस्बों में हर जगह ज़रूरी चीजें उपलब्ध नहीं होती हैं. खाने-पीने से लेकर डीज़ल-पेट्रोल, बड़े से लेकर छोटे सामान तक के व्यापारियों को अपना माल, फैक्ट्रियों में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल, ज़रूरी ईंधन और तमाम तरह जगह से दूसरी जगह ले जानी पड़ती हैं, कभी ये दूरी है तो कभी ये दूरी काफी लंबी होती है. एक बड़ा नेटवर्क काम करता है जो चीजों को तय पर तय पर पहुंचाता है. माल हैं.

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पैमाने पर बात करें तो लोगों की जरूरतों के सामान को विदेश से लाना, उसे अपने पास स्टोर जिस चीज की जरूरत है वहां तक ​​​​ है. प्रक्रिया में सबसे ज्यादा खर्च ईंधन का होता है. इसके अलावा, से माल ले जाने में दूरी और तय जगह तक देरी, टैक्स और , विकसित लॉजिस्टिक सरल पद्धति कारण आसान है और कम .

है National logistics policy?

National logistics policy में सिंगल रेफरेंस पॉइंट बनाया गया है जिसका मकसद अगले 10 सालों में लॉजिस्टिक्स सेक्टर की लागत को 10 प्रतिशत तक लाया जाना है, जो अभी जीडीपी का 13-14 प्रतिशत है. ढुलाई यानी लॉजिस्टिक्स का का काम भारत में सड़कों के ज़रिए होता है. पॉलिसी के तहत अब माल ढुलाई का काम रेल ट्रांसपोर्ट साथ और एयर ट्रांसपोर्ट से होगा. सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि सड़कों पर ट्रैफिक कम दूसरे ईंधन की बचत होगी. समय लगेंगे.

दें कि विश्व बैंक लॉजिस्टिक्स इंडेक्स 2018 के मुताबिक दुनिया के बड़े देशों के भारत माल ढुलाई के खर्च मामले में 44 वें स्थान पर है. इसका मतलब है कि भारत विकसित अमेरिका-चीन-जापान जैसे देशों से बहुत पीछे है. के खर्च के मामले में जर्मनी नंबर वन है यानी वह ढुलाई में सबसे कम खर्च करता है.

माल ढुलाई का नेटवर्क बहुत बड़ा है

भारत में लॉजिस्टिक्स सेक्टर में 20 से ज्यादा सरकारी एजेंसियां, 40 सहयोगी सरकारी एजेंसियां ​​​​(पीजीए), 37 एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल, 500 प्रमाणन और 10,000 से ज्यादा चीजें शामिल हैं. इसमें 200 एजेंसियां, 36 सर्विसेज, 129 अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (आईसीडी), 166 फ्रेट स्टेशन (सीएफएस), 50 आईटी सिस्टम, बैंक और बीमा एजेंसियां ​​​​ . वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने कहा है कि इस सेक्टर की से देश के लोगों को रोजगार मिलता है.

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