Monday, December 5, 2022
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Justice Uday Umesh Lalit Sworn In As 49th Chief Justice Of The India ANN

Chief Justice Uday Umesh Lalit: जस्टिस उदय उमेश ललित (Uday Umesh Lalit) ने आज भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) के रूप में शपथ ली. द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) उन्हें पद की शपथ दिलाई. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankar) के अलावा कई केंद्रीय मंत्री और के जज मौजूद रहे. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के पद पर आसीन होने वाले ललित का का कार्यकाल 8 नवंबर तक होगा.

चीफ जस्टिस यू यू ललित ने संविधान पीठ के सामने सालों से लंबित मामलों के निपटारे अपनी प्राथमिकताओं में एक बताया है. यही वजह है कि 29 अगस्त से संविधान पीठ बैठने जा रही है, जो एक-एक कर 25 अहम मामलों की सुनवाई करेगी.

वकील से सीधे सुप्रीम कोर्ट जज बने हैं नए CJI
स्वभाव के लिए जाने वाले ललित ऐसे दूसरे चीफ जस्टिस होंगे जो सुप्रीम का जज बनने से पहले किसी के जज थे, बल्कि सीधे वकील से इस पद पर पहुंचे हैं. उनसे पहले 1971 में देश के 13वें मुख्य न्यायाधीश एस एम सीकरी ने यह उपलब्धि हासिल की थी.

बड़े वकीलों में गिने जाते थे
9 1957 जन्म लेने वाले उदय उमेश ललित 13 अगस्त 2014 सुप्रीम कोर्ट जज नियुक्त हुए थे. उससे पहले वह देश के सबसे बड़े वकीलों में गिने जाते थे.उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने 2जी घोटाला मामले में विशेष पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किया था.उनके पिता यू. . हाई कोर्ट में अतिरिक्त जज रह चुके हैं. . . देश के सबसे बड़े वकीलों में गिने जाते हैं. के दादा रंगनाथ ललित भी महाराष्ट्र के सोलापुर ज़िले के वकीलों में से एक थे.

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3 तलाक की व्यवस्था रद्द की
में अपने अब तक के कार्यकाल में जस्टिस ललित कई फैसलों के हिस्सा रहे हैं. 22 2017 को तलाक-ए-बिद्दत यानी एक साथ 3 तलाक बोलने की व्यवस्था को असंवैधानिक करार देने वाली 5 जजों की बेंच के वह सदस्य थे. मामले में जस्टिस रोहिंटन नरीमन के साथ लिखे फैसले में उन्होंने कहा था कि इस्लाम में भी एक साथ 3 तलाक को गलत माना गया है. पुरुषों को हासिल एक साथ 3 तलाक बोलने का हक महिलाओं को गैर बराबरी की स्थिति में लाता है. के मौलिक अधिकार के खिलाफ है.

पर नोटिस जारी किया
30 2021 को जस्टिस ललित की अध्यक्षता वाली बेंच ने राजद्रोह के मामले में लगने वाली आईपीसी की धारा 124A की वैधता पर केंद्र को नोटिस जारी किया था. मामले में कोर्ट ने मणिपुर के पत्रकार किशोरचन्द्र वांगखेमचा और छत्तीसगढ़ पत्रकार कन्हैयालाल शुक्ला की याचिका सुनने पर सहमति दी थी.

को दी सज़ा
ही में जस्टिस ललित ने अवमानना ​​​​ भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को 4 महीने की सज़ा दी थी. ने माल्या पर 2 हज़ार रुपए का जुर्माना भी था. यह भी कहा कि जुर्माना न चुकाने पर 2 महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी. बच्चों को यौन शोषण से बचाने पर भी जस्टिस ललित ने अहम आदेश दिया था. अध्यक्षता वाली बेंच ने माना कि सेक्सुअल मंशा शरीर के सेक्सुअल हिस्से का पॉक्सो एक्ट का मामला जा कि ऊपर से बच्चे का स्पर्श यौन शोषण नहीं है.

फ्लैट खरीदारों को राहत
जस्टिस ललित उस बेंच में भी रहे जिसने 2019 में आम्रपाली के करीब 42,000 फ्लैट खरीदारों को बड़ी राहत दी थी. तब कोर्ट ने आदेश दिया था कि आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट को अब नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन NBCC पूरा करेगा. कोर्ट ने निवेशकों के साथ धोखाधड़ी करने वाले आम्रपाली ग्रुप की सभी बिल्डिंग कंपनियों का RERA रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया. ही, निवेशकों के पैसे के गबन और मनी लॉन्ड्रिंग का भी आदेश दिया था.

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SC/ST एक्ट पर फैसला
अनुसूचित जाति/जनजाति उत्पीड़न एक्ट के तहत तुरंत गिरफ्तारी न करने का आदेश भी जस्टिस ललित की सदस्यता बेंच ने दिया था. ने इस एक्ट के तहत आने वाली शिकायतों पर शुरुआती जांच बाद ही मामला दर्ज करने का भी आदेश दिया था. हालांकि, बाद में केंद्र सरकार ने कानून में बदलाव कर तुरंत गिरफ्तारी के प्रावधान को दोबारा बहाल कर दिया था.

से खुद को किया था अलग
10 2019 को जस्टिस यू यू ललित ने खुद को अयोध्या मामले की सुनवाई कर रही 5 जजों की बेंच से खुद को अलग किया था. उन्होंने इस बात को आधार बनाया था कि करीब अयोध्या से जुड़े एक आपराधिक मामले प्रदेश पूर्व मुख्यमंत्री सिंह के वकील के रूप में पेश हो चुके हैं.

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