Thursday, September 29, 2022
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Jammu Teacher Day Celebration Need To Connect Students With Culture And Values – शिक्षक दिवस: विद्यार्थियों को संस्कार व संस्कृति से जोड़ने की जरूरत, मूल्य आधारित शिक्षा पाठ्यक्रम का बने हिस्

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जम्मू-कश्मीर के शिक्षकों का मानना ​​​​ कि स्कूली शिक्षा के साथ ही यह जरूरी है कि विद्यार्थियों को संस्कार व संस्कृति का ज्ञान होना चाहिए। लिए विद्यालयों में मूल्य आधारित शिक्षा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। शिक्षक दिवस पर आयोजित अमर उजाला संवाद में जम्मू के अलावा रियासी, उधमपुर व कठुआ से आए शिक्षकों का कहना है कि युवा संस्कार व संस्कृति से दूर होता जा रहा है। का भाव जगाने की जरूरत है। साथ ही दक्षता विकसित करने की आवश्यकता है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए जरूरी है कि शिक्षकों की प्रोन्नति और नियुक्ति परीक्षा के माध्यम से हो। में मातृभाषा को शिक्षा की भाषा बनाए जाने की जरूरत है।

तौर पर काम करें शिक्षक

उज्जवल भविष्य में एक शिक्षक का बड़ा योगदान होता है। शिक्षक को एक मिशन के तौर पर काम करना चाहिए, जिसका उद्देश्य मूल्यों पर आधारित शिक्षा होनी चाहिए। के स्तर व बौद्धिक क्षमता के अनुरूप तैयार करना होगा। पाठ्यक्रम सहित नैतिक शिक्षा का बड़ा महत्व है। विकास की जरूरत है। तर्क-विर्तक के लिए तैयार करना होगा। – कुलदीप गुप्ता, शिक्षक पुरस्कर विजेता, वरिष्ठ लेक्चरर, जीएचएसएस अरनिया।

जोड़ना होगा स्थानीय भाषा से

पहला कर्तव्य सभी बच्चों को एक नजर से देखना है। के शिक्षा देना वाला ही सच्चा शिक्षक है। नई शिक्षा नीति लागू हो रही है। स्तर की शिक्षा स्थानीय भाषा में देने पर जोर है। स्थानीय भाषा से जोड़ना होगा। हर तरह की चुनौती के लिए खुद को तैयार करना होगा। से खुद को अपडेट करना होगा। – , , रिहाड़ी।

होनी चाहिए शिक्षा पद्धति

छात्र केंद्रित होनी चाहिए। क्षमता के हिसाब से देखना चाहिए। तनाव रहित वातावरण देना होगा। वैचारिक शिक्षा पर भी महत्व देना होगा, ताकि व्यवस्था अंक लेने तक समिति न रहे। नई शिक्षा नीति से तहत प्री-प्राइमरी कक्षाओं का अहम योगदान होगा। शिक्षकों के पास संभावना है कि वह बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर सकें। – शर्मा, शिक्षक, गवर्नमेंट मिडिल स्कूल पथवा (कठुआ)।

नीति के होंगे कई फायदे

पहले कक्षा एक में दाखिला लेने वाले बच्चे स्कूली पढ़ाई के लिए तैयार नहीं होते थे। आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान नहीं देना है। लेकिन नई शिक्षा नीति के तहत प्री-प्राइमरी कक्षाओं से यह समस्या दूर होगी। नीति में वोकेशनल शिक्षा पर जोर दिया जाएगा। समय की मांग की है। बच्चों को जागरूक करना होगा। – सुनील कुमार, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेता, शिक्षक, गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल जाकर टिकरी (उधमपुर)।

चुनौतियों को दूर करने में सक्षम

ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में चुनौतियां ज्यादा हैं, लेकिन शिक्षक उन्हें दूर करने में सक्षम है। सरकारी शिक्षक होने के नाते में अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में ही पढ़ा रहा हूं। शिक्षक से अन्य काम भी करवाए जा रहे हैं, जिससे वह अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं दे पा रहे हैं। पुरस्कार से मिले पैसे से प्रोजेक्टर खरीदा ताकि बच्चों को अगल अनुभव मिले। जल्दी हैं। – संजीव कुमार शर्मा, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेता, गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल पौनी (रियासी)।

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छात्र-शिक्षक संबंध

व्यवस्था को देखने होगा। -शिक्षक का संबंध को समझना होगा। के साथ रोजगारपरक होनी चाहिए। और समाज से सीखते हैं। शिक्षा नीति में सभी चीजों का ध्यान रखा गया है। स्तर पर चुनौतियां हैं। शिक्षण संस्थानों के बुनियादी ढांचे और शिक्षकों की कमी है। पढ़ाने के साथ विभिन्न कार्यों में जोड़ा जा रहा है। – . , वैज्ञानिक,

नीति से कई समस्याएं होंगी दूर

सरकार स्कूली में पढ़ाई के साथ अब शारीरिक गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। नीति में ये गतिविधियां अब पाठ्यक्रम का हिस्सा बन गई हैं। नीति लागू होने से काफी समस्याओं का अंत हो जाएगा। से बच्चों को स्वस्थ्य रखना वर्तमान समय की मांग है। कोविड के बाद बच्चों में आ रही समस्या का समाधन शारीरिक और खेल गतिविधियों में है। – गोविंद शर्मा, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कर विजेता, नोडल अधिकारी, स्कूल शिक्षा निदेशालय, जम्मू।

होगी बच्चों-अभिभावकों की सोच

स्कूलों के प्रति बच्चों और अभिभावकों की सोच बदलनी होगी। शिक्षकों को पद्दोन्नति परीक्षा से मिलनी चाहिए, ताकि युवा और योग्य लोग आगे आएं। के निर्माण में योगदान देता है। में लोगों को लाने के लिए एक नीति की जरूरत है। व्यवस्था सिर्फ परीक्षा देने तक समिति न हो। बच्चों के कौशल व मनोवज्ञानिक विकास का भी आकलन हो। – . , लेक्चरर, इंचार्ज काउंसलिंग सेल, शिक्षा निदेशालय जम्मू।

गणित के भय को दूर करने की जरूरत

कारण इस पेशे को अपनाया है। में गणित के भय को दूर करने की जरूरत है। पद्दोन्नति परीक्षा के आधार पर हो। प्रशिक्षण में भी सुधार करना होगा। नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देने की जरूरत है। के साथ समाज और अभिभावकों का बड़ा योगदान होना चाहिए। इमानदारी से काम काम करना होगा। – राकेश कुमार चौबर, सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार विजेता, अकादमिक अधिकारी, एससीईआरटी जम्मू।

एक कलाकार की तरह पढ़ाना चाहिए

था और कभी शिक्षक नहीं बनना चाहता था। हालात ऐसे बने की इस पेशे से लगाव हो गया। एक कलाकार की तरह पढ़ाना चाहिए। रोजगार से जोड़ने की जरूरत है। वह है जो बच्चों में कुछ करने की भावना जगाए। शिक्षा नीति बच्चों को स्थानीय भाषा में पढ़ाने को मत्हव देती है जो एक अच्छी पहल है। – , स्कूल, जम्मू।

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जम्मू-कश्मीर के शिक्षकों का मानना ​​​​ कि स्कूली शिक्षा के साथ ही यह जरूरी है कि विद्यार्थियों को संस्कार व संस्कृति का ज्ञान होना चाहिए। लिए विद्यालयों में मूल्य आधारित शिक्षा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। शिक्षक दिवस पर आयोजित अमर उजाला संवाद में जम्मू के अलावा रियासी, उधमपुर व कठुआ से आए शिक्षकों का कहना है कि युवा संस्कार व संस्कृति से दूर होता जा रहा है। का भाव जगाने की जरूरत है। साथ ही दक्षता विकसित करने की आवश्यकता है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए जरूरी है कि शिक्षकों की प्रोन्नति और नियुक्ति परीक्षा के माध्यम से हो। में मातृभाषा को शिक्षा की भाषा बनाए जाने की जरूरत है।

तौर पर काम करें शिक्षक

उज्जवल भविष्य में एक शिक्षक का बड़ा योगदान होता है। शिक्षक को एक मिशन के तौर पर काम करना चाहिए, जिसका उद्देश्य मूल्यों पर आधारित शिक्षा होनी चाहिए। के स्तर व बौद्धिक क्षमता के अनुरूप तैयार करना होगा। पाठ्यक्रम सहित नैतिक शिक्षा का बड़ा महत्व है। विकास की जरूरत है। तर्क-विर्तक के लिए तैयार करना होगा। – कुलदीप गुप्ता, शिक्षक पुरस्कर विजेता, वरिष्ठ लेक्चरर, जीएचएसएस अरनिया।

जोड़ना होगा स्थानीय भाषा से

पहला कर्तव्य सभी बच्चों को एक नजर से देखना है। के शिक्षा देना वाला ही सच्चा शिक्षक है। नई शिक्षा नीति लागू हो रही है। स्तर की शिक्षा स्थानीय भाषा में देने पर जोर है। स्थानीय भाषा से जोड़ना होगा। हर तरह की चुनौती के लिए खुद को तैयार करना होगा। से खुद को अपडेट करना होगा। – , , रिहाड़ी।

होनी चाहिए शिक्षा पद्धति

छात्र केंद्रित होनी चाहिए। क्षमता के हिसाब से देखना चाहिए। तनाव रहित वातावरण देना होगा। वैचारिक शिक्षा पर भी महत्व देना होगा, ताकि व्यवस्था अंक लेने तक समिति न रहे। नई शिक्षा नीति से तहत प्री-प्राइमरी कक्षाओं का अहम योगदान होगा। शिक्षकों के पास संभावना है कि वह बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर सकें। – शर्मा, शिक्षक, गवर्नमेंट मिडिल स्कूल पथवा (कठुआ)।

नीति के होंगे कई फायदे

पहले कक्षा एक में दाखिला लेने वाले बच्चे स्कूली पढ़ाई के लिए तैयार नहीं होते थे। आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान नहीं देना है। लेकिन नई शिक्षा नीति के तहत प्री-प्राइमरी कक्षाओं से यह समस्या दूर होगी। नीति में वोकेशनल शिक्षा पर जोर दिया जाएगा। समय की मांग की है। बच्चों को जागरूक करना होगा। – सुनील कुमार, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेता, शिक्षक, गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल जाकर टिकरी (उधमपुर)।

चुनौतियों को दूर करने में सक्षम

ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में चुनौतियां ज्यादा हैं, लेकिन शिक्षक उन्हें दूर करने में सक्षम है। सरकारी शिक्षक होने के नाते में अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में ही पढ़ा रहा हूं। शिक्षक से अन्य काम भी करवाए जा रहे हैं, जिससे वह अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं दे पा रहे हैं। पुरस्कार से मिले पैसे से प्रोजेक्टर खरीदा ताकि बच्चों को अगल अनुभव मिले। जल्दी हैं। – संजीव कुमार शर्मा, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेता, गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल पौनी (रियासी)।

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छात्र-शिक्षक संबंध

व्यवस्था को देखने होगा। -शिक्षक का संबंध को समझना होगा। के साथ रोजगारपरक होनी चाहिए। और समाज से सीखते हैं। शिक्षा नीति में सभी चीजों का ध्यान रखा गया है। स्तर पर चुनौतियां हैं। शिक्षण संस्थानों के बुनियादी ढांचे और शिक्षकों की कमी है। पढ़ाने के साथ विभिन्न कार्यों में जोड़ा जा रहा है। – . , वैज्ञानिक,

नीति से कई समस्याएं होंगी दूर

सरकार स्कूली में पढ़ाई के साथ अब शारीरिक गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। नीति में ये गतिविधियां अब पाठ्यक्रम का हिस्सा बन गई हैं। नीति लागू होने से काफी समस्याओं का अंत हो जाएगा। से बच्चों को स्वस्थ्य रखना वर्तमान समय की मांग है। कोविड के बाद बच्चों में आ रही समस्या का समाधन शारीरिक और खेल गतिविधियों में है। – गोविंद शर्मा, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कर विजेता, नोडल अधिकारी, स्कूल शिक्षा निदेशालय, जम्मू।

होगी बच्चों-अभिभावकों की सोच

के प्रति बच्चों और अभिभावकों की सोच बदलनी होगी। शिक्षकों को पद्दोन्नति परीक्षा से मिलनी चाहिए, ताकि युवा और योग्य लोग आगे आएं। के निर्माण में योगदान देता है। में लोगों को लाने के लिए एक नीति की जरूरत है। व्यवस्था सिर्फ परीक्षा देने तक समिति न हो। के कौशल व मनोवज्ञानिक विकास का भी आकलन हो। – . , लेक्चरर, इंचार्ज काउंसलिंग सेल, शिक्षा निदेशालय जम्मू।

गणित के भय को दूर करने की जरूरत

कारण इस पेशे को अपनाया है। में गणित के भय को दूर करने की जरूरत है। पद्दोन्नति परीक्षा के आधार पर हो। प्रशिक्षण में भी सुधार करना होगा। नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देने की जरूरत है। के साथ समाज और अभिभावकों का बड़ा योगदान होना चाहिए। इमानदारी से काम काम करना होगा। – राकेश कुमार चौबर, सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार विजेता, अकादमिक अधिकारी, एससीईआरटी जम्मू।

एक कलाकार की तरह पढ़ाना चाहिए

था और कभी शिक्षक नहीं बनना चाहता था। हालात ऐसे बने की इस पेशे से लगाव हो गया। एक कलाकार की तरह पढ़ाना चाहिए। रोजगार से जोड़ने की जरूरत है। वह है जो बच्चों में कुछ करने की भावना जगाए। शिक्षा नीति बच्चों को स्थानीय भाषा में पढ़ाने को मत्हव देती है जो एक अच्छी पहल है। – , स्कूल, जम्मू।

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