Wednesday, November 30, 2022
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HP High Court : बहाना बनाकर नियुक्ति न देने पर शिक्षा विभाग को 20 लाख का हर्जाना देने का आदेश

Author: Virender KumaraPublication date: Tue 30 Aug 2022 21:58 (IST)Date Updated: Tue Aug 30 2022 10:05 PM (IST)

s HP High Court, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शैक्षिक योग्यता मान्यता का बहाना बनाते हुए गैरकानूनी ढंग से प्रार्थी को नियुक्ति न देने पर शिक्षा विभाग को चुकाने के आदेश दिए। विवेक सिंह ठाकुर ने प्रार्थी निगमा देवी की याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किए। कोर्ट ने यह हर्जाना राशि दो माह के भीतर अदा करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट के आदेशानुसार यह राशि एक जनवरी, 2008 के बाद के सभी शिक्षा विभाग के मुखिया से वसूलने के आदेश भी दिए। इन अधिकारियों में शिक्षा सचिव, प्रधान शिक्षा सचिव व अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा विभाग शामिल हैं, जिनसे यह राशि प्रो राटा आधार पर उनके कार्यकाल के आधार पर तय की जाएगी।

ने शिक्षा विभाग द्वारा राज्य की लिटिगेशन पालिसी का ध्यान न रखते हुए मामले को बेवजह अदालत में लड़ते रहने के कारण यह मुआवजा बतौर टोकन निर्धारित किया है। किया कि जब कोर्ट से एक मामले में फैसला आ जाए तो उसी तरह के सिमिलर मामलों में वही फायदा लिटिगेशन पालिसी के तहत दिया जाना चाहिए। मामले के अनुसार प्रार्थी निगमा देवी शिक्षा विभाग में भाषा अध्यापक के रूप में नियुक्त होने का हक रखती थी शिक्षा विभाग ने उसे नियुक्ति देने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि उसकी शैक्षणिक योग्यता प्रदेश में रोजगार के लिए मान्य नहीं है। ने सुनवाई के दौरान पाया कि जब प्रार्थी की योग्यता जैसी ही योग्यता वाली एक अन्य शिक्षिका को नियुक्ति दी गई थी तो प्रार्थी को भी वही लाभ दिया जाना जरूरी था। विभाग ने अपनी गलती मानते हुए प्रार्थी को नियुक्ति देने की इच्छा वर्ष 2014 में जताई थी परंतु प्रार्थी द्वारा उस समय सेवानिवृत्ति आयु पूरी होने के कारण ऐसा करने में असमर्थता जताई थी।

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नायब तहसीलदारों की नियुक्तियां रद करने के आदेश

हाईकोर्ट ने आठ मई, 2020 को जारी कानूनगो की वरिष्ठता सूची के आधार पर पदोन्नत किए नायब तहसीलदारों की नियुक्तियों को रद करने के आदेश जारी किए। ने कानूनगो की आठ मई, 2020 को जारी वरिष्ठता सूची को रद करते इसे पुन: जारी करने के आदेश दिए।

न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने यह व्यवस्था दी कि राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए कार्यकारी निर्देश भर्ती एवं पदोन्नति नियमों (आरएंडपी)की जगह नहीं ले सकते। कोर्ट ने 10 , 1997 को कानूनगो की वरिष्ठता सूची को निर्धारित करने बाबत जारी किए गए कार्यकारी निर्देशों को गैरकानूनी ठहराते हुए व कानूनगो की वरिष्ठता सूची पुन: जारी करने के आदेश दिए।

प्रार्थी कुलदीप कुमार व अन्यों ने हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दाखिल कर 20 फरवरी, 2020 को राज्य सरकार द्वारा जारी पत्र को यह कहकर चुनौती दी थी कि यह भर्ती एवं पदोन्नति नियम 1992 के विपरीत जारी किया गया है। पत्र जारी करने के पीछे 30 जून, 1997 को राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए कार्यकारी निर्देशों का हवाला दिया गया था। तहत कानूनगो की वरिष्ठता सूची बदल दी गई और निजी तौर पर बनाए गए प्रतिवादियों को उनसे ऊपर वरिष्ठता सूची में स्थान दे दिया गया।

याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार प्रार्थियों को वर्ष 1998 में भर्ती एवं पदोन्नाति नियम 1992 के तहत पटवारी के पदों पर नियुक्त किया गया था। उनकी वरिष्ठता नियम 15 (ए) व 15 (बी) के तहत निर्धारित की गई थी। प्रार्थियों की दलील थी कि कार्यकारी निर्देश भर्ती एवं पदोन्नति नियमों की जगह नही ले सकते। उच्च न्यायालय ने प्रार्थियों की दलीलों से सहमति जताते हुए उनकी याचिका को स्वीकार कर लिया। निर्देशों के आधार पर जारी की गई वरिष्ठता सूची को रद करते हुए कानूनगो की वरिष्ठता सूची पुन: जारी करने के आदेश जारी किए। नहीं कार्यकारी निर्देशों के आधार पर जारी की गई वरिष्ठता सूची के तहत दी गई पदोन्नतियों को भी हाईकोर्ट ने रद कर दिया। उच्च न्यायालय ने पदोन्नतियों के लिए रिव्यू डीपीसी करने के आदेश जारी कर दिए।

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Edited by: Virender Kumara

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