Thursday, December 8, 2022
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Hearing Begins In Supreme Court On The Issue Of Celebrating Ganeshotsav At Idgah Ground In Bengaluru – बेंगलुरू के ईदगाह मैदान में नहीं होगा गणेशोत्‍सव समारोह, SC ने यथास्थिति बरकरार रखने के दिए निर्देश

कपिल सिब्बल ने कहा,”2022 में निगम इसे विवादित बताते हुए इस पर गणेशोत्सव करने पर आमादा है. ये संपदा 1965 में भी दस्तावेजों में वक्फ की मिल्कियत है.” ने कहा कि कमिश्नर की रिपोर्ट के आधार पर गणेश उत्सव इजाजत दी गई जबकि इस ग्राउंड को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी है. कपिल सिब्बल ने कहा,”1964 में जस्टिस हिदायतुल्ला ने हमारे पक्ष में आदेश दिया था और यह वक्फ अधिनियम के तहत वक्फ संपत्ति है. 1970 हमारे पक्ष में निषेधाज्ञा दी गई थी. होने के बाद चुनौती नहीं दी जा सकती . कि जमीन विवाद में है . 2022 अचानक जागे हैं.”

जस्टिस अभय एस ओक ने पूछा कि क्या पहले यहां कोई धार्मिक गतिविधि हुई है. पर सिब्बल ने कहा कभी नहीं हुई है.जस्टिस सुंदरेश ने पूछा,” मामले में आपकी आपत्ति क्या है? अनुमति दी गई है वह रमजान और बकरीद है. हाईकोर्ट का निर्देश है कि कृपया सभी त्योहारों को अनुमति दें या यह आपकी शिकायत है कि इसका इस्तेमाल एक विशेष त्योहार के लिए किया जा रहा है?” सुंदरेश ने पूछा,”केवल कल के लिए प्रस्तावित त्योहार के खिलाफ शिकायत है या उसके बाद के लिए भी इस्तेमाल किया जाना है?”

रोहतगी ने कहा कि निगम मालिक नहीं है और यह राज्य सरकार की संपत्ति है. ने कहा कि जब तक यह वक्फ संपत्ति तब तक आप स्वामित्व का नहीं कर सकते है अधिसूचना कभी भी किसी भी स्तर पर चुनौती नहीं दी गई.

कपिल सिब्बल ने कहा,”दो समुदायों के विवाद पर FIR दर्ज कर दी गई..ये परेशान करने वाला है ..इसमें बाबरी से संबंधित कुछ बात कही गई हैं..अदालत को ये सब रोकना चाहिए.”

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की ओर से दुष्यंत दवे ने कहा कि सरकार ने कुछ देर ही खुलासा कि उन्होंने दिनों के लिए गणेश चतुर्थी की है. उन्होंने कहा कि इसे छूने या छेड़छाड़ का अधिकार क्षेत्र किसी के पास नहीं है.

कपिल सिब्बल ने कहा कि मेरी गुजारिश है कि इस मामले में ये अदालत हस्तक्षेप करें। अजीब है कि अचानक 2022 में वक्फ संपत्ति पर मालिकाना का दावा किया जाने लगा.

कोर्ट ने निगम से पूछा कि पहले कभी निगम ने ऐसे आयोजनों की इजाजत दी है? मुकुल रोहतगी ने कहा कि पुरानी नजीर विरोध या इंकार का कारण नहीं हो सकती. भी राजनीतिक आयोजन, कर्नाटक राज्य स्थापना दिवस उत्सव और आयोजन यहां होते रहे हैं. प्रार्थना भी होती है औऱ पर कोई बहस है. मालिक नहीं तो ये सब कैसे हो रहे थे?”

रोहतगी ने कहा,”राजस्व अथॉरिटी का आदेश सिंगल बेंच के आदेश का आधार था. 15 साल पहले जब इस तरह का विवाद हुआ था तो सभी पक्ष, उपायुक्त और मंत्री भी मौजूद थे. , गणेश चतुर्थी, आदि के लिए भूमि का उपयोग करने अनुमति देने लिए सहमत हुए.

ओक ने कहा लेकिन यह सिर्फ राजनीतिक के बीच थी. रोहतगी ने जवाब दिया कि पिछले इस भूमि का उपयोग बच्चों के मैदान के रूप में किया जा रहा है. खुली भूमि जो निजी संपत्ति नहीं है सरकार में निहित है.” मुकुल रोहतगी ने कहा कि इस में कोई चारदीवारी नहीं है, फुटपाथ नहीं हैं और मैदान में बच्चे खेलते हैं. स्वामित्व का दावा नहीं कर सकता.”

रोहतगी ने कहा,”सारे मुकदमें निषेधाज्ञा के हैं, किसी में मालिकाना हक का है सिर्फ इकट्ठा होकर प्रार्थना का हक है. जितनी भी संपत्ति है वो किसी की निजी संपत्ति नहीं है वो सरकार की है. की नमाज होने से स्वामित्व नहीं हो जाता.”

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