Wednesday, November 30, 2022
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Explainer: आखिर चीता भारत लाने की क्यों पड़ी जरूरत, इनके नहीं होने का पर्यावरण को क्या नुकसान होता है? – Why Cheetah is important for India and Kuno National Park tstr

चीता (cheetah). सबसे भागने जानवर. 120 . 1948 खुले जंगल में तीन का शिकार किया गया. छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले का साल जंगल. 1952 को विलुप्त घोषित कर दिया गया. स्वतंत्र भारत के पहले वाइल्डलाइफ मीटिंग के की गई थी. 70 देश में नहीं थे. चीतों को भारत लाने की क्या जरुरत पड़ गई. तो था. ठीक था. हैं ?

है कि पहले चीते नहीं आ सकते थे. 1970 दशक में ईरान के शाह ने कहा था कि हम को चीते देने के लिए तैयार हैं. लेकिन बदले में आपसे हमें शेर (Lion) चाहिए. लगभग उसी दौरान भारत की सरकार ने वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट बनाया. 1972 किया गया. अनुसार देश में किसी भी जगह किसी भी जंगली जीव का शिकार करना प्रतिबंधित है. इन्हें मारने की कोई वैज्ञानिक वजह न हो. वो इंसानों के लिए खतरा न बने.

बाद देश में जंगली जीवों लिए संरक्षित इलाके गए. चीतों संभवतः गए. इसकी उठी 2009 . जब वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) ने राजस्थान के गजनेर दो दिन इंटरनेशनल वर्कशॉप रखा. हुए इस दो दिवसीय आयोजन में यह मांग की गई भारत में चीतों को वापस लाया जाए. के एक्सपर्ट इस कार्यक्रम में थे. के मंत्री और संबंधित विभाग के अधिकारी भी थे.

Cheetah In Kuno National Park

राज्यों में चीतों के लायक वातावरण

गया कि चार राज्य हैं, जहां पर चीतों को रखा जा सकता है. हैं- प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश. लगता था कि इन पांचों राज्यों में से किसी भी पर चीतों को रखा जा सकता है. से वातावरण है. लेकिन फिर तय किया गया कि नहीं हम कुछ सर्वे और बारीक जांच करते है. चीतों को मंगाने का ख्याल होल्ड पर रखा गया. वजह ये थी कि ईरान के चीतों का जेनेटिक्स अफ्रीकन चीतों से मिलता जुलता है. गया अफ्रीकन चीतों को लाने के पक्ष में.

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राज्यों के 10 जगहों को तय किया गया. ये सात अलग-अलग तरह के लैंडस्केप पर मौजूद हैं. गुरु पार्क. बन्नी . में डुबरी वाइल्डलाइफ सेंचुरी, नेशनल पार्क, बागडारा वाइल्डलाइफ सेंचुरी, वाइल्डलाइफ सेंचुरी और कूनो नेशनल पार्क. डेजर्ट नेशनल पार्क वाइल्डलाइफ सेंचुरी और शाहगढ़ ग्रासलैंड्स और की कैमूर वाइल्डलाइफ सेंचुरी.

Cheetah In Kuno National Park

गया कूनो नेशनल पार्क?

नाम की अंतरराष्ट्रीय वाइल्डलाइफ मैगजीन के जर्नलिस्ट मनीष चंद्र मिश्र ने कि चीतों के विलुप्त होने के बाद भारतीय ग्रासलैंड की इकोलॉजी खराब हुई थी. था. प्रजाति है. चेन में सबसे ऊपर मौजूद जीव. नहीं आता तो फूड का संतुलन पूरी तरह से बिगड़ जाता. नेशनल पार्क चुना इसलिए गया क्योंकि वहां पर चीतों के खाने की कमी नहीं है. मात्रा में शिकार करने लायक जीव हैं. जीव काफी मात्रा में मौजूद हैं. पसंद हैं. इस में बढ़ेगा. को आएंगे. भी होगा.

है कि सिर्फ वही दस साइट्स चुने गए थे. उनके अलावा IUCN के नियमों के तहत अगर किसी जीव को कहीं फिर लाया जाता है तब और की भी जांच की जाती है. और स्थानों की जांच की गई थी. राजस्थान के मुकुंदारा हिल्स , वाइल्डलाइफ सेंचुरी और भैंसरोरगढ़ वाइल्डलाइफ सेंचुरी, मध्यप्रदेश की गांधी सागर वाइल्डलाइफ सेंचुरी और माधव नेशनल पार्क. पार्क दोबारा गया.

Cheetah In Kuno National Park

पार्क का मौसम सटीक है

चीते (Cheetah) को ग्रासलैंड यानी थोड़े ऊंचे घास वाले मैदानी इलाकों में रहना पसंद है. . . ज्यादा हो. . पहुंच हो. ठंडा हो. न हो. बातों का ध्यान से विश्लेषण करने के बाद पता चला कि नेशनल पार्क अफ्रीकन चीतों के लिए सबसे उपयुक्त जगह है. चीतों के सर्वाइव करने की संभावना सबसे ज्यादा है.

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पार्क 748 किलोमीटर का इलाका है. जिसमें इंसानों का आना-जाना बेहद कम है. नहीं . पार्क का बफर एरिया 1235 वर्ग किलोमीटर है. पार्क के बीच में कूनो नदी (Kuno River) बहती है. , बहुत तेज ढाल की नहीं हैं. दक्षिण-पूर्वी इलाके में पन्ना टाइगर रिजर्व से बाउंड्री है. शिवपुरी हैं. के पास ही चंबल नहीं बहती है. चीतों के पास कुल मिलाकर 6800 वर्ग रहेगा. औसत तापमान 42.3 डिग्री सेल्सियस रहता है. न्यूनतम तापमान 6 से 7 सेल्सियस रहता है. सालभर में 760 बारिश होती है.

Cheetah In Kuno National Park

पार्क में खाने की कमी नहीं

कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) कोई इंसानी बस्ती या गांव नहीं है. -बाड़ी. लिए शिकार करने लायक बहुत कुछ है. जैसे- चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली सुअर, चिंकारा, चौसिंघा, ब्लैक बक, ग्रे लंगूर, लाल मुंह वाले , शाही, भालू, सियार, लकड़बग्घे, ग्रे भेड़िये, गोल्डेन सियार, बिल्लियां, मंगूज जैसे कई जीव. जमीन पर हो या पहाड़ी पर. में हो या फिर पेड़ पर, उसे खाने की भी हालत में नहीं होगी. में सबसे ज्यादा चीतल मिलते हैं, शिकार करना चीतों को पसंद आएगा. नेशनल पार्क के अंदर चीतल की आबादी 38.38 से लेकर 51.58 प्रति वर्ग किलोमीटर है. के लिए खाने की कोई कमी नहीं है.

पार्क में इंसानों की बस्ती

में पहले करीब 24 थे. रहते दूसरी जगहों पर शिफ्ट कर दिया गया. मवेशियों के साथ दूसरे स्थानों पर चले गए. कूनो नेशनल पार्क के 748 वर्ग किलोमीटर के पूर्ण संरक्षित की सीमा से बाहर भेज दिया गया है. काम 1998 पूरो हो थे. जाते-जाते ग्रामीणों ने अपनी बिल्लियां और कुत्तों को भी ही छोड़ दिया था. 500 . भी चीता के शिकार बनने लायक हैं.

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Cheetah In Kuno National Park

आ सकते हैं इस नेशनल पार्क में

किसी भी नेशनल पार्क में किसी बड़े शिकारी जीव को तब लाया जाता है, शिकारी की संख्या के में शिकार मौजूद है. इसके साथ ही नेशनल पार्क का आकार भी जोड़ा-घटाया जाता है. का शिकार आमतौर पर वो जीव होते हैं, जिनका वजन 60 किलोग्राम के आसपास होता है. जैसे चीतों के शिकार के प्रतिशत की गणना करें तो ये 10 फीसदी लंगूरों का ही शिकार कर पाएंगे. नीलगाय या सांभर की पूरी आबादी का 30 फीसदी हिस्सा ही खा सकते हैं. इन सारे गणित और एनालिसिस एक्सपर्ट्स मुताबिक कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) में 21 चीतों के लिए शिकार है. चीते हैं. अगर 3200 वर्ग किलोमीटर में सही प्रबंधन किया जाए तो यहां पर 36 चीते आ सकते हैं. सकते हैं और पूरे आनंद साथ शिकार कर हैं.

गया नामीबिया के चीतों को?

भी देश से दूसरे देश में जंगली जीवों का प्रत्यर्पण करते कुछ खास बातों का ध्यान रखा जाता है. कि जिस देश से चीता आ रहा है, क्या वह देश लगातार कुछ सालों तक चीतों की सप्लाई करता रहेगा. जेनेटिक्स है. . है नहीं. संतुलन है. ही चीते नामीबिया से आकर मध्यप्रदेश के वातावरण, रहने लायक जगह की स्थिति, शिकार के प्रकार आदि से एडजस्ट कर पाएगा या नहीं. मामलों में नामीबिया के चीतों ईरान के को पिछाड़ दिया. अगले पांच साल तक चीतों लिए नामीबिया समझौता हुआ है. से प्रोसेस है.

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