Sunday, November 27, 2022
HomeBreaking NewsEWS Quota Supreme Court hearing in constitution bench - India Hindi News...

EWS Quota Supreme Court hearing in constitution bench – India Hindi News – EWS कोटे पर SC में उठा सवाल

सुप्रीम कोर्ट की कांस्टीट्यूशन बेंच ने मंगलवार को ईडब्लूएस कोटे के संवैधानिक वैधता को लेकर दायर केसेज की सुनवाई की। चीफ जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी, एस रविंद्र भट, बेला एम त्रिवेदी और जेबी पारदीवाला की बेंच ने अगले में केस की सुनवाई पूरी करने की बात कही है। -माने डॉ. ने मामले में दलीलें पेश कीं। तर्क दिया कि आरक्षण को वंचित समूह को प्रतिनिधित्व देने का साधन माना जाता रहा है। कोटा ने इस कांसेप्ट को पूरी तरह से उलट दिया है। . मोहन गोपाल ने यह भी कहा कि ईडब्लूएस कोटे का लाभ अगड़े वर्ग को मिलता है। सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग बाहर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा होने से संविधान की मूल भावना का उल्लंघन होता है, जिसके तहत समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांत की बात की गई है।

103वें पर उठाया सवाल
के सामने दलील देते हुए डॉ. गोपाल ने 103वें संशोधन पर भी सवाल उठाया। कहा कि यह संशोधन संविधान पर हमले के रूप में देखा जाना चाहिए। जोर देकर कहा कि अगर ईडब्लूएस वास्तव में आर्थिक आरक्षण होता, तो यह जाति के बावजूद गरीब लोगों को दिया जाता। नहीं गया। . गोपाल ने समझाया कि ईडब्ल्यूएस कोटा लागू होने से पहले जो आरक्षण मौजूद थे, वे जाति-पहचान पर आधारित नहीं थे, बल्कि सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन और प्रतिनिधित्व की कमी पर आधारित थे। हालांकि, 103वें संशोधन में कहा गया है कि पिछड़े वर्ग ईडब्ल्यूएस कोटा के हकदार नहीं हैं और यह केवल अगड़े वर्गों में गरीबों के लिए उपलब्ध है। कहा कि कुमारी बनाम केरल राज्य में यह कहा गया था कि सभी वर्ग सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के रूप में शामिल होने के हकदार हैं।

See also  Gautam Adani's Mega Port Project Stalled As A Fishing Community Protests

आरक्षण को अरब सागर में फेंक देंगे
करते डॉ. ने कहा कि हमें आरक्षण में कोई दिलचस्पी नहीं है। में रुचि रखते हैं। कोई आरक्षण से बेहतर प्रतिनिधित्व का तरीका लाता है, तो हम आरक्षण को अरब सागर में फेंक देंगे। कि किसी की भी फाइनेंशियल कंडीशन एक क्षणिक स्थिति है। लॉटरी जीतने या जुआ हारने जैसी किसी एक घटना से बदल सकती है। कहा कि रिजर्वेशन इसलिए लाया गया ताकि पिछड़ों को शिक्षा और नौकरी में प्रतिनिधित्व मिल सके। सामाजिक स्थिति और निजी जिंदगी में बदलाव लाया जा सके। . गोपाल के मुताबिक ईडब्ल्यूएस आरक्षण एक व्यक्ति या एक परिवार की स्थिति पर आधारित है। आरक्षण समुदाय की सामाजिक और शैक्षिक स्थिति पर आधारित है।

का दिया हवाला
. गोपाल ने कहा कि यह मान लेना एक भ्रम है कि एसईबीसी आरक्षण जाति-आधारित है और इसमें उच्च जातियों को शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में, सामाजिक भेदभाव के शिकार कई ब्राह्मण समुदायों को ओबीसी आरक्षण के तहत लाभ दिया गया है। कहा कि अनुच्छेद 15(4) और 15(5) के तहत आरक्षण उन सभी जातियों के लिए है जो सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हैं। हालांकि, अनुच्छेद 15(6), जिसे 103वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया है, विशेष रूप से इसे उन लोगों के लिए बताता है जो एससी/एसटी और एसईबीसी आरक्षण के अंतर्गत नहीं आते हैं। जोर देकर कहा कि पिछड़े वर्गों का बहिष्कार अवैध है। गरीब व्यक्ति को बताते हैं कि आप निचली जाति से होने के कारण हकदार नहीं हैं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments