Saturday, December 10, 2022
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Education – सरकारी स्कूल भवन की हालत खस्ता बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने के लिए मजबूर


स्कूल भवन की हालत खस्ता बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने के लिए मजबूर
– : RAJOURIA

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I सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने की सरकार बड़े-बड़े दावे तो करती है, लेकिन जिले के दूरदराज के में जमीनी स्तर पर अभी भी बच्चों को बुनियादी सुविधाएं तो दूर सरकारी स्कूल में भवन भी हासिल नहीं है।
जिले के पीढ़ी शिक्षा जोन के तहत पढ़ने वाले पंचायत हल्का घरोट बी पड्यारा स्थित सरकारी मिडिल स्कूल के भवन की खस्ता हालत के चलते बच्चे खुले आसमान मेें पढ़ाई पर करने के लिए मजबूर हैं। उक्त स्कूल को वर्ष 1978 में प्राइमरी स्कूल के तौर पर स्थापित किया गया, और 2017 में इस का दर्जा बढ़ा कर मिडिल स्कूल किया गया, लेकिन सरकारी स्कूल के भवन की खस्ता हालत को सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। सरकारी स्कूल के भवन की हालत इतनी खस्ता है कि स्कूल में पढ़ाई कर रहे करीब 95 बच्चे और शिक्षक हर रोज डर के मारे जीवन बिता रहे हैं। की हालत इतनी खस्ता है कि उन्हें डर सताता रहता है। कभी भवन ढह सकता है, लेकिन सरकार व शिक्षा विभाग ने लापरवाह रवैया अख्तियार किया हुआ है। नहीं दिया जा रहा।
स्कूल में पढ़ाई कर रहे बच्चोें के अभिभावकों शौकत हुसैन, अब्दुल जब्बार, नसीम मलिक, मोहम्मद शकूर आदि ने कि उनके बच्चों को खुले आसमान में पढ़ाई करनी पड़ रही है, और आलम यह है कि जब कभी बारिश होती है तो कर ️ उन्होंने कहा कि दूर-दराज के गांव में स्थित सरकारी स्कूल में कोई भी सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। बच्चे स्कूल जाने को तैयार रहते हैं। उन्होंने जिला प्रशासन और एलजी सरकार से गुहार लगाते हुए कहा कि तत्काल स्कूल भवन की मरम्मत करने या नया भवन बनाने के लिए फंड्स जारी करें, ताकि उनके बच्चों का भविष्य संवर सके।
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की मरम्मत के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया। है कि जल्द ही फंड्स जारी किए जाएंगे और काम शुरू किया जाएगा।
-अब्दुल डार, शिक्षा योजना अधिकारी।

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I सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने की सरकार बड़े-बड़े दावे तो करती है, लेकिन जिले के दूरदराज के में जमीनी स्तर पर अभी भी बच्चों को बुनियादी सुविधाएं तो दूर सरकारी स्कूल में भवन भी हासिल नहीं है।

जिले के पीढ़ी शिक्षा जोन के तहत पढ़ने वाले पंचायत हल्का घरोट बी पड्यारा स्थित सरकारी मिडिल स्कूल के भवन की खस्ता हालत के चलते बच्चे खुले आसमान मेें पढ़ाई पर करने के लिए मजबूर हैं। उक्त स्कूल को वर्ष 1978 में प्राइमरी स्कूल के तौर पर स्थापित किया गया, और 2017 में इस का दर्जा बढ़ा कर मिडिल स्कूल किया गया, लेकिन सरकारी स्कूल के भवन की खस्ता हालत को सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। सरकारी स्कूल के भवन की हालत इतनी खस्ता है कि स्कूल में पढ़ाई कर रहे करीब 95 बच्चे और शिक्षक हर रोज डर के मारे जीवन बिता रहे हैं। की हालत इतनी खस्ता है कि उन्हें डर सताता रहता है। कभी भवन ढह सकता है, लेकिन सरकार व शिक्षा विभाग ने लापरवाह रवैया अख्तियार किया हुआ है। नहीं दिया जा रहा।

स्कूल में पढ़ाई कर रहे बच्चोें के अभिभावकों शौकत हुसैन, अब्दुल जब्बार, नसीम मलिक, मोहम्मद शकूर आदि ने कि उनके बच्चों को खुले आसमान में पढ़ाई करनी पड़ रही है, और आलम यह है कि जब कभी बारिश होती है तो कर ️ उन्होंने कहा कि दूर-दराज के गांव में स्थित सरकारी स्कूल में कोई भी सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। बच्चे स्कूल जाने को तैयार रहते हैं। उन्होंने जिला प्रशासन और एलजी सरकार से गुहार लगाते हुए कहा कि तत्काल स्कूल भवन की मरम्मत करने या नया भवन बनाने के लिए फंड्स जारी करें, ताकि उनके बच्चों का भविष्य संवर सके।

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की मरम्मत के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया। है कि जल्द ही फंड्स जारी किए जाएंगे और काम शुरू किया जाएगा।

-अब्दुल डार, शिक्षा योजना अधिकारी।

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