Thursday, September 29, 2022
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Dr S Jaishankar Says I Will Envy The Person Who Is The Foreign Minister In 2047 – जयशंकर का तंज: वोट बैंक की राजनीति विदेश नीति पर हो गई थी हावी, इस्राइल के साथ संबंध बढ़ाने से रोका

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. एस जयशंकर ने गुजरात में रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान 2047 के भारत पर बात करते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि मैं उस व्यक्ति से ईर्ष्या करूंगा जो 2047 में विदेश मंत्री होगा, लेकिन मैं आपको एक बात बताऊंगा, नरेंद्र मोदी सरकार का विदेश मंत्री होना भी एक बड़ी ताकत है। विश्वास, आत्मविश्वास और दृष्टिकोण हैं और दुनिया इसे पहचान रही है। दरअसल, जयशंकर ने यह बयान इसलिए दिया क्योंकि पीएम मोदी ने एक कार्यक्रम कहा था कि 2047 में भारत विकसित देश बन जाएगा और विकसित देश का विदेश मंत्री होना अपने में बड़ी बात है। बता दें कि जयशंकर की किताब ‘द इंडिया वे: स्ट्रैटेजीज फॉर एन अनसर्टेन वर्ल्ड’ के गुजराती अनुवाद का विमोचन करने के लिए गुजरात के अहमदाबाद में समारोह आयोजित किया गया था। इसी मौके पर विदेश मंत्री ने जनसंख्या नियंत्रण से लेकर भविष्य में भारत की विदेश नीति पर बात की।

की राजनीति विदेश नीति पर हावी हो गई थी
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत- इस्राइल संबंधों के बारे में बात करते हुए कहा कि एक समय था बैंक की राजनीति विदेश नीति पर हावी गई थी जिसने इस्राइल के संबंध को आगे बढ़ाने से रोका। उन्होंने कांग्रेस का नाम लिए बिना तंज करते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक कारणों से, हमें खुद को इस्राइल के साथ संबंध बढ़ाने से प्रतिबंधित करना पड़ा। मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री थे जो इस्राइल गए थे… अब वह समय जा चुका है जब हम वोट बैंक की राजनीति से राष्ट्रहित को अलग रखते हैं। फायदे के लिए विदेश नीति को प्रभावित नहीं करते हैं।

बड़ी अर्थव्यवस्था, दिखाना चाहिए
कहा कि पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते भारत को आत्मविश्वास दिखाना चाहिए। कमी हमारी आदतों के कारण है जो हमें बांधे रखती है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को एंगेज करना, चीन को मैनेज करना, रूस को आश्वस्त करना… भारत की विदेश नीति में ‘सबका साथ-सबका विकास’ है। जयशंकर ने कहा, “अब तक, जब भी हम महासागरों के बारे में सोचते हैं, हम हिंद महासागर के में सोचते हैं। यह हमारी सोच की सीमा कि जब तो हम हिंद महासागर के बात करते हैं।”

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प्रशांत महासागर की ओर से जाता है 50 प्रतिशत व्यापार
. एस जयशंकर ने कहा हमारा पचास प्रतिशत से ज्यादा व्यापार पूर्व की ओर प्रशांत महासागर की ओर जाता है। हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बीच की रेखा केवल मानचित्र-एटलस पर मौजूद है, लेकिन वास्तविकता में ऐसा कुछ नहीं है…हमें अपनी सोच में ऐतिहासिक रेखाओं से परे जाना चाहिए। हिंद प्रशांत दुनिया में चल रही एक नई रणनीतिक अवधारणा है। पुस्तक एक अध्याय के बारे में बात करते हुए विदेश मंत्री ने कहा यह कि हमें दुनिया में दूसरों की समस्याओं में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, एक तरह की हठधर्मिता है।

नियंत्रण के बहुत खतरनाक परिणाम
भारत में जनसंख्या नियंत्रण पर विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने कहा कि भारतीय जनसंख्या की वृद्धि दर गिर रही है, इसका कारण शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और समृद्धि है। हम में से प्रत्येक के बीच परिवार का आकार, समय बीतने के साथ छोटा हो रहा है। जबरन जनसंख्या नियंत्रण के बहुत खतरनाक परिणाम हो सकते हैं, यह लिंग असंतुलन पैदा कर सकता है।

वजह से नहीं दिखता हमारा आत्मविश्वास
उन्होंने कहा कि यह संभव है कि 1950 और 1960 के दशक में हमारे पास क्षमता नहीं थी और यह हमारे हित में नहीं था लेकिन कुछ दिन पहले हम पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गए। 20वें नंबर और 5वें नंबर किसी की सोच समान नहीं हो सकती है। क्षमता के अनुसार बदलना चाहिए। हमें आत्मविश्वास दिखाना चाहिए, जो नहीं है और ऐसा इसलिए नहीं है क्योंकि हमारी आदतें हमें बांधे रखती हैं। विदेश मंत्री ने कहा, हम उस स्तर पर पहुंच गए हैं जहां हमें अपने हितों को आगे बढ़ाने के जितना हो सभी के साथ भारत की प्रगति तरह से हमारे लिए मानदंड बन जाती है।

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. एस जयशंकर ने गुजरात में रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान 2047 के भारत पर बात करते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि मैं उस व्यक्ति से ईर्ष्या करूंगा जो 2047 में विदेश मंत्री होगा, लेकिन मैं आपको एक बात बताऊंगा, नरेंद्र मोदी सरकार का विदेश मंत्री होना भी एक बड़ी ताकत है। विश्वास, आत्मविश्वास और दृष्टिकोण हैं और दुनिया इसे पहचान रही है। दरअसल, जयशंकर ने यह बयान इसलिए दिया क्योंकि पीएम मोदी ने एक कार्यक्रम कहा था कि 2047 में भारत विकसित देश बन जाएगा और विकसित देश का विदेश मंत्री होना अपने में बड़ी बात है। बता दें कि जयशंकर की किताब ‘द इंडिया वे: स्ट्रैटेजीज फॉर एन अनसर्टेन वर्ल्ड’ के गुजराती अनुवाद का विमोचन करने के लिए गुजरात के अहमदाबाद में समारोह आयोजित किया गया था। इसी मौके पर विदेश मंत्री ने जनसंख्या नियंत्रण से लेकर भविष्य में भारत की विदेश नीति पर बात की।

की राजनीति विदेश नीति पर हावी हो गई थी

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत- इस्राइल संबंधों के बारे में बात करते हुए कहा कि एक समय था बैंक की राजनीति विदेश नीति पर हावी गई थी जिसने इस्राइल के संबंध को आगे बढ़ाने से रोका। उन्होंने कांग्रेस का नाम लिए बिना तंज करते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक कारणों से, हमें खुद को इस्राइल के साथ संबंध बढ़ाने से प्रतिबंधित करना पड़ा। मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री थे जो इस्राइल गए थे… अब वह समय जा चुका है जब हम वोट बैंक की राजनीति से राष्ट्रहित को अलग रखते हैं। फायदे के लिए विदेश नीति को प्रभावित नहीं करते हैं।

बड़ी अर्थव्यवस्था, दिखाना चाहिए

कहा कि पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते भारत को आत्मविश्वास दिखाना चाहिए। कमी हमारी आदतों के कारण है जो हमें बांधे रखती है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को एंगेज करना, चीन को मैनेज करना, रूस को आश्वस्त करना… भारत की विदेश नीति में ‘सबका साथ-सबका विकास’ है। जयशंकर ने कहा, “अब तक, जब भी हम महासागरों के बारे में सोचते हैं, हम हिंद महासागर के में सोचते हैं। यह हमारी सोच की सीमा कि जब तो हम हिंद महासागर के बात करते हैं।”

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प्रशांत महासागर की ओर से जाता है 50 प्रतिशत व्यापार

. एस जयशंकर ने कहा हमारा पचास प्रतिशत से ज्यादा व्यापार पूर्व की ओर प्रशांत महासागर की ओर जाता है। हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बीच की रेखा केवल मानचित्र-एटलस पर मौजूद है, लेकिन वास्तविकता में ऐसा कुछ नहीं है…हमें अपनी सोच में ऐतिहासिक रेखाओं से परे जाना चाहिए। हिंद प्रशांत दुनिया में चल रही एक नई रणनीतिक अवधारणा है। पुस्तक एक अध्याय के बारे में बात करते हुए विदेश मंत्री ने कहा यह कि हमें दुनिया में दूसरों की समस्याओं में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, एक तरह की हठधर्मिता है।

नियंत्रण के बहुत खतरनाक परिणाम

भारत में जनसंख्या नियंत्रण पर विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने कहा कि भारतीय जनसंख्या की वृद्धि दर गिर रही है, इसका कारण शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और समृद्धि है। हम में से प्रत्येक के बीच परिवार का आकार, समय बीतने के साथ छोटा हो रहा है। जबरन जनसंख्या नियंत्रण के बहुत खतरनाक परिणाम हो सकते हैं, यह लिंग असंतुलन पैदा कर सकता है।

वजह से नहीं दिखता हमारा आत्मविश्वास

उन्होंने कहा कि यह संभव है कि 1950 और 1960 के दशक में हमारे पास क्षमता नहीं थी और यह हमारे हित में नहीं था लेकिन कुछ दिन पहले हम पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गए। 20वें नंबर और 5वें नंबर किसी की सोच समान नहीं हो सकती है। क्षमता के अनुसार बदलना चाहिए। हमें आत्मविश्वास दिखाना चाहिए, जो नहीं है और ऐसा इसलिए नहीं है क्योंकि हमारी आदतें हमें बांधे रखती हैं। विदेश मंत्री ने कहा, हम उस स्तर पर पहुंच गए हैं जहां हमें अपने हितों को आगे बढ़ाने के जितना हो सभी के साथ भारत की प्रगति तरह से हमारे लिए मानदंड बन जाती है।

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