Thursday, September 29, 2022
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Bengaluru’s Flood: इसलिए डूबी सिलिकॉन सिटी… मास्टर प्लान फेल, जलनिकासी रोकी गई, घाटियों में निर्माण – original causes behind bengaluru flooding tstr

आते ही देश के बड़े का आटा होने लगता है. बेकार है. और जल जमाव की स्थिति लोग जूझते नज़र हैं. के जमीन की स्थिति अलग होती है. वहां हो रहे योजनागत और गैर-योजनागत निर्माणकार्य. या निर्माण. बढ़ता . के कंस्ट्रक्शन. सड़क हो, इमारत हो या फिर तरीके का निर्माण. मौसम अलग है. पड़ोसी शहर सूखा है लेकिन हमारा शहर डूब गया.

ऊंचाई वाले रिज पर बसा है. घाटियां . का है. (फोटोः )

और चेन्नई जैसे तटीय शहरों में तूफानों की वजह से बाढ़ खतरा बढ़ जाता है. का सारा पानी समुद्र में जाता है. समुद्र से पानी वापस आने तो दिक्कत होने है. ऐसे किसी भी शहर की स्टॉर्म ड्रेन क्षमता यानी बारिश के पानी को निकालने की क्षमता समुद्र की तरफ से आने वाले पानी से कम होता है. है कि हम शहरों विकास के दौरान उनके पैटर्न को समझें. बनावट रखें. नज़र . शहर के इकोसिस्टम और पर्यावरण का भी.

करते की. सिलिकॉन गई. असल में अपने खूबसूरत मौसम, आईटी हब के लिए प्रसिद्ध यह शहर एक ऊंचाई वाले रिज (Ridge) पर बसा है. जहां पर पानी कावेरी (Kaveri) और पोनाइयार या दक्षिणा पिनाकिनी के वाटरशेड में विभाजित है. में हैं. बहने वाला पानी इन दोनों नदियों में जाता है. आपको समझाते हैं शहर के हर पहलू को ग्राफिक्स के जरिए…

जमीन की स्थिति इस नक्शे से समझिए

The flood of Bengaluru

इस नक्शे में बेंगलुरु की टोपोग्राफी यानी स्थलाकृति मतलब जमीन की बनावट दिखाई गई है. रहा है शहर का हिस्सा ऊंचाई वाले रिज पर बसा है. का उपयोग कृषि और जैसे लक्ष्यों के लिए किया जाता था. सिंचाई के लिए घाटी से सटे मैदानी इलाकों में मेढ़ों (Bunds) का निर्माण किया गया था. को सके. से कई जगहों पर झीलें बन गई हैं. का अपना कमांड एरिया है, जहां से उसका पानी लेकर सिंचाई किया जाता है. आसपास के इलाकों को सींचती हैं ये झीलें.

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और जलमार्गों से बन गईं आर्टिफिशियल झीलें

The flood of Bengaluru

वाले इलाकों से घाटियों की तरफ पानी के बहाव के लिए जलमार्ग बने हुए थे. तौर पर कुछ इंसानों द्वारा बनाए गए. पुराने जलमार्गों को रीडिजाइन करके आर्टिफिशियल नहरें (Kaluve) बनाई गईं. झील से उसके कमांड में मौजूद जमीनों की सिंचाई हो सके. पानी की मात्रा ज्यादा तो उसे डाउनस्ट्रीम में बहाया जा सके. में मौजूद कई छोटी नहरें जो किसी की निजी संपत्ति थीं, वो बंद हो गईं. का दबाव बड़ी और पुरानी नहरों पर बढ़ गया. या फिर वो पानी इन छोटी नहरों से बाहर निकल कर जमीन पर फैल गया.

तो जमीन की बनावट बदलती चली गई

की आबादी 1901 में 1.6 थी. के समय में एक करोड़ ज्यादा लोग पर रहते हैं. तेजी से बढ़ी आबादी की वजह से शहर में जमीन की जरुरत भी बढ़ा दी. से शहर तेजी से फैलने लगा. लेकिन लोगों ने जमीन की बनावट (Topography) को नहीं समझा. ऊंचाई वाले इलाकों में निर्माण होता चला गया. टोपोग्राफी नहीं. पानी के छोटी-छोटी निकासी और नहरें बंद होती गईं. गईं.

गायब हुईं, रुकी तो जलजमाव

The flood of Bengaluru

निर्माण से न सिर्फ जमीन के अंदर पानी के जाने की स्थिति बिगड़ी घाटियों में पानी के बहाव में भी अंतर आया. के पास मौजूद पुराने निकासी के माध्यम खत्म होते चले गए. वजह से दिक्कत ये होने लगी भारी बारिश में पानी का जब बढ़ा तो निकासी का कोई रास्ता ही नहीं बचा. थे वो बंद हो चुके थे. से जमा लगा. जो नहरें पहले सिर्फ सिंचाई के लिए बनाई गईं थीं, अब वो इतनी मात्रा जलभराव और बहाव संभालने के लिए उपयुक्त नहीं थीं. ढेर सारे निर्माणकार्यों, सीवेज के बहाव और कचरे के जमाव की वजह से नहरों में पानी का बहाव रुकता चला गया.

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The flood of Bengaluru

बाढ़ और जलजमाव की वजह है घाटियों में रुकावट. बहुत कम ही मामले हैं जब घाटियों के अलावा किसी और में बाढ़ आई हो. हो. यानी ऊंचाई वाले इलाकों में जलजमाव की घटनाएं सड़कों के किनारे की गुणवत्ता और स्टॉर्म ड्रेन्स की वजह से हुई थीं.

इलाकों से समझिए बेंगलुरु की बाढ़

The flood of Bengaluru

के दो इलाकों की हालत बार बहुत ही रही. RMZ EcoSpace जो कि आउटर रिंग रोड पर है. रोड मौजूद ड्राइव. में पहले भी बाढ़ आती रही है. में जमीन की बनावट कार्यों की वजह से बिगड़ चुकी है. जलनिकासी के माध्यम पर्याप्त नहीं है. हैं. जलजमाव हो है.

बीच सड़कों के निर्माण से भी हो रही दिक्कत

The flood of Bengaluru

लगातार तेजी से फैल रहा है. से नए इलाकों में बाढ़ का खतरा ज्यादा है. न कहीं ये पानी के बहाव को लेकर सही व्यवस्था तो कर पा रहे हैं. गलत हैं. इसका सबसे अच्छा उदाहरण है बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेसवे. कुछ हिस्सों ने जमीन की को ही बदल है. एक्सप्रेस वे और उसके टोल गेट के निर्माण ने घाटी की शक्ल ही बदल दी. ये दोनों ही घाटी के बीचो-बीच बने हैं. वजह से पानी का बहाव तरह से प्रभावित है. इसलिए अब इस हाइवे के दोनों तक भयानक बाढ़ या जलजमाव की स्थिति बनती है.

विफल रहा शहर का मास्टर प्लान

The flood of Bengaluru

का मास्टर प्लान ऐसा है कि वो शहर को पूरी तरह से सुरक्षित नहीं रखता. प्लान कुछ छोटे-छोटे बफर जोन बनाए गए हैं, बाढ़ से बचाने का सहारा माना गया है. जोन जलस्रोतों और धाराओं के आसपास ही मौजूद हैं. शहरों में मास्टर प्लान लैंड मार्केट को सही से में विफल रहा है. एड-हॉक डेवलपमेंट को वैध करना और मास्टर प्लान में मार्केट विकसित करने में विभिन्नताओं ने दिक्कत पैदा की है. से शहर के विकास में लैंड यूज का जो प्रस्तावित था वो हो गया है.

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रहे कॉन्क्रीट के जंगलों ने मिट्टी की पानी सोखने की को खत्म कर दिया है. अनियोजित शहरीकरण और की स्थिति में , तेज बारिश में पानी के समुचित तरीके से चलाने और सतही से बेंगलुरु जैसे शहरों में बाढ़ बन रही .

The Bengaluru Flood: सिलिकॉन सिटी को डुबोने में मुख्य वजह है जलनिकासी को रोकना.  (फोटोः )
The Bengaluru Flood: सिलिकॉन सिटी को डुबोने में मुख्य वजह है जलनिकासी को रोकना. (फोटोः )

यह बेहद जरूरी है कि हम अपने शहरों की जमीन की स्थिति को पहले समझें. समय के लिए सटीक प्लानिंग कर सकें. में निवेश करने से पहले ऐसी बातों का बारीकी से और कड़े नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है. भविष्य में बेंगलुरु जैसे शहरों बाढ़ से बचाया सके.

(बेंगलुरु की बाढ़ पर यह विस्तृत विश्लेषण किया है राज भगत पलानीचामी ने. राज बेंगलुरु स्थिति WRI India में जियो एनालिटिक्स फॉर सस्टेनेबल सिटीज़ एंड ट्रांसपोर्ट प्रोग्राम के सीनियर प्रोग्राम मैनेजर हैं.)

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