Friday, September 30, 2022
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200 सप्लायर्स से जुटाए जाते है कंपोनेंट, फिर असेंबलिंग; आईफोन-13 प्रो की लागत 45000 रुपए | Iphone manufacturing process | Cheapest Country to Buy Iphone 14 | Iphone 14 launch

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दिल्ली30:

के कूपरटिनो सिटी की एक बिल्डिंग में एक प्रोजेक्ट पर काम चल रहा था। नाम था ‘प्रोजेक्ट पर्पल’। इस प्रोजेक्ट के लिए जब लोगों को हायर किया जा रहा था तब शर्त रखी गई कि टीम को दिन-रात काम करना होगा। के किसी भी सदस्य को उस बिल्डिंग से बाहर जाने की इजाजत नहीं होगी। को बस इतना ही बताया गया था कि ये अब तक का सबसे बड़ा प्रोडक्ट होगा।

के पास रहने वाले लोगों को भी नहीं पता था कि इसमें क्या काम चल रहा है। सैकड़ों इंजीनियर्स की टीम दिन-रात मेहनत करती रही और तीन साल बाद 2007 में पूरी दुनिया ने इस प्रोडक्ट को देखा। ️ ने सेन फ्रांसिस्को में दुनिया का पहला आईफोन पेश किया। अब 15 साल हो चुके हैं। इन 15 सालों में आईफोन काफी बदल चुका है। का सबसे प्रॉफिटेबल और सबसे ज्यादा बिकने वाला प्रोडक्ट है।

पहली रिलीज के बाद से अब तक 2 अरब से ज्यादा आईफोन बिक चुके हैं। वहीं एपल की अपकमिंग आईफोन-14 सीरीज 7 सितंबर यानी आज लॉन्च होने वाली है। आईफोन की मैन्य़ुफैक्चरिंग की बात करें तो सबसे ज्यादा प्रोडक्शन चीन के झेंग्झौ में एक विशाल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में हाता हैं। ऐसे में यहां हम आपको फैक्ट्री फ्लोर से रिटेल स्टोर तक कैसे आईफोन पहुंचता है इस बारे में बता रहे हैं।

काम जुटाना
की शुरुआत होती है कंपोनेंट जुटाने से। हर एक आईफोन में 200 से ज्यादा सप्लायर्स से जुटाए गए कंपोनेंट होते हैं। एपल अपने आईफोन्स के लिए मेमोरी चिप, मॉडेम, कैमरा मॉड्यूल, माइक्रोफोन और टच-स्क्रीन कंट्रोलर जैसे कई कंपोनेंट दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से खरीदता है।

ग्लोबल सप्लायर्स से कंपोनेंट जुटाकर फॉक्सकॉन जैसे कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चर्स को बेच देता है। ताइवान की कंपनी फॉक्सकॉन चीन में स्थित अपनी झेंग्झौ (Zhengzhou) फैसिलिटी में मेटल केसिंग जैसे कुछ छोटे पार्ट बनाती है। और भारत दोनों जगह अपने आईफोन का प्रोडक्शन करती है।

फोन असेंबली असेंबली
चीन की फैक्ट्री में हर मिनट लगभग 350 आईफोन का उत्पादन किया जा सकता है। झेंग्झौ में फॉक्सकॉन की फैसिलिटी 2.2 वर्ग मील में फैली हुई है और इसमें 3.50.000 कर्मचारी काम कर सकते हैं। में जहां फॉक्सकॉन का प्लांट है उसे आईफोन सिटी भी कहा जाता है। साइट पर 94 लाइन्स हैं।

आईफोन असेंबलिंग में पॉलिशिंग, सोल्डरिंग, ड्रिलिंग और फिटिंग स्क्रू सहित लगभग 400 स्टेप्स लगती हैं। यह फैसिलिटी एक दिन में 500,000 आईफोन्स का उत्पादन कर सकती है। लाइन के बाद आईफोन को एक चिकने सफेद फाइबर बोर्ड बॉक्स में बंद कर लकड़ी के पैलेट पर रखा जाता है। आईफोन्स को बाहर खड़े ट्रकों में लोड कर दिया जाता है।

आईफोन असेंबलिंग में पॉलिशिंग, सोल्डरिंग, ड्रिलिंग और फिटिंग स्क्रू सहित लगभग 400 स्टेप्स लगती हैं

आईफोन असेंबलिंग में पॉलिशिंग, सोल्डरिंग, ड्रिलिंग और फिटिंग स्क्रू सहित लगभग 400 स्टेप्स लगती हैं

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करीब फैसिलिटी
नए असेंबल किए गए आईफोन को फैक्ट्री गेट से कुछ सौ गज की दूरी पर ले जाया जाता है, जहां चीन ने एक बड़ी सरकारी कस्टम्स फैसिलिटी का निर्माण किया है। यहां से आईफोन को अमेरिका और दुनिया के अन्य हिस्सों में भेजे जाने के लिए एयरपोर्ट लाया जाता है। झेंग्झौ एयपोर्ट मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी से करीब 3 मील की दूरी पर है। के उत्पादन में बढ़ोतरी के साथ बीते कुछ सालों में एयरपोर्ट का काफी विस्तार किया गया है।

कुछ साल पहले, चीन में बने पर्सनल कम्प्यूटरों को कंटेनर शिप से अमेरिका ले जाया जाता था, जिसमें लगभग एक महीने का समय लगता था। स्मार्टफोन काफी छोटे होते हैं जिन्हें भारी मात्रा में प्लेन से भेजा जा सकता है। एक सिंगल वाइड-बॉडी बोइंग 747 आसानी से अपने एल्यूमीनियम केनिस्टर्स में 150,000 आईफोन ले जा सकता है। झेंग्झौ से यूपीएस, फेडेक्स और अन्य फ्रेट कैरियर्स से आम तौर पर यूनाइटेड स्टेट्स-बाउंड आईफोन भेजे जाते हैं।

सेफेडेक्स और अन्य फ्रेट कैरियर्स से आईफोन अमेरिका और अन्य जगह भेजे जाते हैं

सेफेडेक्स और अन्य फ्रेट कैरियर्स से आईफोन अमेरिका और अन्य जगह भेजे जाते हैं

सैन फ्रांसिस्को में लगभग एक समय में पहुंचते हैं आईफोन
शंघाई में आईफोन मिलने में लगभग उतना ही समय लगता है, जितना कि सैन फ्रांसिस्को में। चीन के बाजार की ओर जाने वाले आईफोन के लिए कस्टम ड्यूटी ऑफिसर एक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं। इन आईफोन्स पर एक्सपोर्ट का वर्चुअल स्टैंप लगाया जाता है फिर इंपोर्ट की रिस्टैंपिंग होती है। ये प्रोसेस फैक्ट्री के ठीक बाहर मौजूद फैसिलिटी में होती है।

बार जब प्रोडक्ट को इंपोर्ट घोषित कर दिया जाता है, तो कस्टम्स इंपोर्ट प्राइस के आधार पर वैल्यू ऐडेड टैक्स कलेक्ट करते हैं। प्रकार का नेशनल टैक्स है। में प्रोडक्ट को चीन के आसपास ट्रांसपोर्ट के लिए अप्रूव कर दिया जाता है। डोमेस्टिक आईफोन्स को आमतौर पर एक बड़े ट्रक पर लोड कर पूर्वी चीन में झेंग्झौ से शंघाई तक 18 घंटे की ड्राइव कर पहुंचाया जाता है। का नेशनल डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर है।

एक ट्रैक्टर-ट्रेलर में 36,000 आईफोन तक होते हैं। ये ट्रैक्टर ट्रेलर कैमरों से लैस होते हैं और कभी-कभी आर्म्ड सिक्योरिटी गार्ड भी साथ होते हैं। के झेंग्झौ में फॉक्सकॉन फैक्ट्री छोड़ने के बाद, शंघाई में एक स्टोर तक पहुंचने में औसतन दो दिन लगते हैं। करीब 590 की यात्रा होती है। वहीं लगभग 6,300 मील दूर सैन फ़्रांसिस्को में एक स्टोर तक इसे पहुंचने में औसतन तीन दिन लग जाते हैं।

आईफोन्स को एक बड़े ट्रक पर लोड कर चीन में झेंग्झौ से शंघाई भेजा जाता है

आईफोन्स को एक बड़े ट्रक पर लोड कर चीन में झेंग्झौ से शंघाई भेजा जाता है

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2017 बन रहे आईफोन
एपल ने 2017 में आईफोन SE के साथ भारत में आईफोन्स की मैन्युफैक्चरिंग शुरू की थी। इसके तीन इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विस (ईएमएस) पार्टनर- फॉक्सकॉन, विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन है जिनकी भारत में फैक्ट्री हैं। आईफोन SE के बाद भारत में आईफोन 11, आईफोन 12 और आईफोन 13 की मैन्युफैक्चरिंग भी की गई। प्लांट चेन्नई के पास श्रीपेरंबदूर में है।

के 7 महीने बाद भारत में बना आईफोन 13
पिछले साल सितंबर में आईफोन 13 के लॉन्च होने के लगभग छह से सात महीने बाद भारत में इसकी मैन्युफैक्चरिंग शुरू हुई थी। हालांकि आईफोन 14 की मैन्युफैक्चरिंग लॉन्च के एक महीने बाद ही शुरू होने की उम्मीद है। एपल के 2022 में अपने तीन कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर के माध्यम से भारत में 11-12 मिलियन आईफोन्स बनाने की उम्मीद है। 2021 ये संख्या 7.5 मिलियन थी।

डिमांड का 85% पूरा होगा
इसका मतलब है कि एपल के भारतीय प्लांट ग्लोबल शिपमेंट में 5-7% योगदान देंगे और लोकल डिमांड का 85% पूरा करेंगे। पॉलिटिकल टेंशन और कोरोना महामारी के बाद एपल समेत अन्य अमेरिकी टेक दिग्गज चीन के बाहर भी अपनी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के विस्तार पर काम कर रहे हैं। ऐप्पल ने सितंबर 2020 भारत में अपना पहल ऑनलाइन स्टोर लॉन्च किया था।

भारत सरकार की PLI स्कीम का हिस्सा एपल
एपल के तीनों कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर भारत सरकार की 41,000 करोड़ रुपए की प्रोडक्शन-लिंक्ड इन्सेंटिव स्कीम (PLI) का हिस्सा है। के बाद ही भारत में आईफोन मैन्युफैक्चरिंग में तेजी आई है। 2020 में भारत सरकार ने PLI scheme को लॉन्च किया था। स्कीम से बाहर के देशों की कंपनीज को मौका मिलता है कि वो लोकल मैन्युफैक्चरिंग का फायदा उठा सकें, साथ ही उस पर इन्सेंटिव भी कमा सकें।

जियो पॉलिटिकल टेंशन और कोरोना महामारी के बाद एपल ने चीन से निर्भरता कम की और भारत में भी मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाई

जियो पॉलिटिकल टेंशन और कोरोना महामारी के बाद एपल ने चीन से निर्भरता कम की और भारत में भी मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाई

iPhone 14 ?
आईफोन 14 को देश में असेंबल किया जाएगा, लेकिन इससे स्थानीय रूप से बनाए गए आईफोन्स की कॉस्ट में कमी नहीं आएगी। निर्मित होने के बावजूद, iPhone 13 की कीमत 79,900 रुपए थी। 7 महीने पहले लॉन्च के समय भी इसकी कीमत इतनी ही थी। इसलिए आईफोन 14 की कीमत में भी कमी आने की संभावना नहीं है।

भारत में एपल के OEM (ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स) कंपोनेंट पर हाई इंपोर्ट ड्यूटी पे करते हैं। इसके अलावा GST और अन्य शुलक भी लगते हैं। रूप से निर्मित आईफोन्स की कॉस्ट अभी भी ज्यादा है। अलावा एपल भारत में अपने स्मार्टफोन और अन्य उत्पादों को बेचने के लिए थर्ड पार्टी रिटेल नेटवर्क पर निर्भर है जिससे आईफोन की कीमत भी बढ़ जाती है।

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आईफोन चीन में ही क्यों बनवाती है?
की असेंबलिंग चीन में होती है। कारण लेबर की कम कॉस्ट है? इन्वेस्टोपीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक आईफोन कर्मचारी का औसत वेतन 10 डॉलर प्रति घंटा है। करने वाले लगभग $27 प्रति घंटा कमाते हैं।

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एपल के CEO टिम कुक के अनुसार, चीन में मैन्युफैक्चरिंग का कारण लो लेबर कॉस्ट नहीं है। अगर ऐसा होता, तो एपल अपने फोन को और भी सस्ती जगहों पर बना सकता था। के अनुसार मुख्य कारण टूलिंग इंजीनियरिंग में जरूरी स्किल है। उनका दावा है कि स्पेसिफिक स्किल सेट अब यूएस में उपलब्ध नहीं है, लेकिन चीन के पास एक्सपर्टीज है।

-अलग देशों में अलग कीमतें
आईफोन का घर है और यहां सबसे कम कीमतों पर आईफोन मिलते हैं। मैन्युफैक्चरिंग के बावजूद अमेरिका की तुलना में आईफोन महंगा बिकता हैं। करेंसी फ्ल्कचुएशन और चीन में लगाए जाने वाले भारी भरकम वैल्यू ऐडेड टैक्स के कारण होता है।

तरह भारत में भी मैन्युफैक्चरिंग के बावजूद आईफोन अमेरिका की तुलना में काफी महंगा बिकता है। अमेरिका में 128 जीबी वाले आईफोन 13 की कीमत करीब 60800 रुपए है जबकि चीन में यह करीब 68400 और भारत में 79800 रुपए में मिलता है। अमेरिका के बाद जापान, हॉन्गकॉन्ग ऐसी जगहें हैं जहां ये सस्ता मिलता है।

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की कॉस्ट कॉस्ट
इन्वेस्टोपीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक आईफोन 13 Pro बनाने की लागत $ 570 थी। 1 वाले मॉडल को अमेरिका में $1,499 में लॉन्च किया गया था। वही भारत में आईफोन 12 जब लॉन्च हुआ था तो उसकी कीमत 128 GB के लिए 84,900 रुपए और 64 GB वैरिएंट के लिए 79,900 रुपए थी।

काउंटरप्वाइंट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक इसे बनाने की कीमत सिर्फ 30,300 रुपए है। यानी कंपनी एक आईफोन पर करीब 3 गुना मुनाफा कमाती है। और सिक्योरिटी पर भी एपल का काफी पैसा खर्च होता है। और फीचर्स के कारण ही इन्हें इतना महंगा बेचा जाता है।

सबसे कंपोनेंट
जापानी टियरडाउन एक्सपर्ट फोमलहॉट टेक्नो सॉल्यूशंस ने आईफोन 12 और आईफोन 12 प्रो के लिए बिल ऑफ मैटेरियल्स (बीओएम) पर अपनी रिपोर्ट जारी की थी। इसमें कहा गया था कि आईफोन 12 BoM की कीमत $373 है जबकि 12 प्रो की $406 है। iPhones के सबसे महंगे कंपोनेंट में सैमसंग के बनाए OLED डिस्प्ले हैं जो करीब $70 प्रति यूनिट में पड़ती है।

एक और एक्सपेंसिव कंपोनेंट क्वालकॉम X55 5G मॉडेम है जिसकी कॉस्ट लगभग $90 है। A14 बायोनिक चिपसेट की प्रोडक्शन कॉस्ट $40 बताई जाती है। अन्य कंपोनेंट जैसे RAM ($12.8 यूनिट) और फ्लैश मेमोरी ($19.2 प्रति यूनिट) भी एक्सपेंसिव कंपोनेंट में शामिल हैं। आईफोन में लगे सोनी के कैमरा सेंसर की कीमत $7.4 और $7.9 प्रति यूनिट के बीच हैं।

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