Sunday, December 4, 2022
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सेल्समैन की नौकरी की, नैपकिन बेचा; फिर आशिकी और बाजीगर जैसी फिल्में लिखीं | journey of robin bhatt Bollywood writer and half brother of Mukesh Bhatt

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रॉबिन भट्ट, बॉलीवुड डायरेक्टर महेश भट्ट का सौतेला भाई। , आशिकी, दिल है कि मानता नहीं जैसी फिल्मों का राइटर। डायरेक्ट भी किया हूं। -बढ़ा में। पापा कभी-कभार घर आते, देर रात आते तो अलसुबह निकल जाते। मैं सोचता था आखिर पापा कौन सा ऐसा काम करते हैं, जो घर पर नहीं रहते। 10 साल का हुआ तो पता चला, मेरी दो मां हैं। यानी पापा ने दो शादियां की हैं, इसलिए वे घर पर कम रहते हैं।

कहानी लौटता हूं…

जन्म 10 मार्च 1946 हुआ। -पापा की शादी कब हुई थी, पता। ने दूसरी शादी कब की थी, ये भी नहीं मालूम। इतना पता है कि उनकी शादी के तकरीबन 10 साल बाद मेरा जन्म हुआ था और महेश भट्ट मुझसे दो साल छोटे हैं।

कब बाहर जाते, कब घर आते, पता नहीं चलता। मिलना और बातचीत बहुत कम होती। कभी भी मुझे मुंबई से बाहर घुमाने लेकर नहीं गए। -कभार शूटिंग पर अपने साथ ले जाते थे। खूब होती। तब लगता कि पापा बड़े आदमी हैं, लेकिन क्या हैं ये नहीं पता था।

मां हेमलता भट्ट हैं। 2014 मां अस्पताल में भर्ती थीं।

मां के काफी करीब रहा। कहूं तो मेरे लिए वहीं मां ही पापा भी थीं। उनकी वजह से ही मैंने पापा को कभी मिस नहीं किया और न ही कभी मुझे जरूरत महसूस हुई। कम थीं। से कोई शिकायत नहीं होती थी। पर भी ज्यादा कुछ नहीं डांटती।

शिरीन मोहम्मद से मेरी पहली मुलाकात उनके घर पर हुई। में थीं। एक रोज पापा के पीछे-पीछे मैं सीढ़ी चढ़कर उनके घर चला गया। से आवाज आई कि कौन आया है? ने जवाब दिया- रॉबिन बाबा आए हैं। आवाज आई कि उन्हें अंदर भेजो।

बेडरूम गया। लेटी थीं। थीं। उन्होंने मुझसे कहा कि अरे यह शर्ट क्यों पहना है, यह तुम्हारे लिए छोटा है। दिया कि मां ने पहना दिया। कहने लगी कि मैं उनसे बात करूंगी कि तुम्हें नया शर्ट दिलवा दें। बात जिस अपनेपन से कही वो मुझे बहुत अच्छी लगी।

पापा नानाभाई भट्ट और मां हेमलता भट्ट।  काम करने के लिए पापा गुजरात से मुंबई आए थे।

पापा नानाभाई भट्ट और मां हेमलता भट्ट। काम करने के लिए पापा गुजरात से मुंबई आए थे।

जैसे-जैसे मैं बड़ा होता गया, मेरे मन में सवाल उठने लगा कि आखिर पापा ने ऐसा क्यों किया। पत्नी के रहते दूसरी शादी क्यों की। कई बार यह सवाल मां से पूछने की कोशिश भी की, लेकिन उनकी आखें देखकर रुक जाता था।

वो यह कहना चाहती थीं कि यह सवाल पूछने की तुम्हें इजाजत नहीं है। जब मां ने कभी नहीं बताया, तो मैंने भी उनसे कभी नहीं पूछा।

से ही सवाल करता था। पर गुस्सा भी करता था और फिर मन मारकर चुप भी रह जाता था। सोचता था कि जब मां को तकलीफ नहीं तो मैं क्या कर सकता हूं। दूसरी बात वो अपनी खामोशी और आंखों के इशारे से यह भी जताने की कोशिश करती कि इस रिश्ते को मैं निभा रही हूं, तो तुम्हें भी निभाना है।

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कभी प्यार नहीं दिखाती थीं। होने पर बस मुस्कुरा देतीं। शब्दों से तो उन्होंने कभी गुस्सा जाहिर नहीं किया, लेकिन उनके अंदर एक तूफान चलता था, बहुत सारे सवाल होते होंगे, लेकिन वह शांत रहती थीं। जानती थीं कि कुछ नहीं हो सकता है। निभाना है।

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कई बार मैं बीमार हो जाता या घर में कोई और बीमार हो जाता, तो मां ही डॉक्टर के पास ले जाती थीं। मेरे स्कूल का सारा-हिसाब किताब भी मां को पता रहता था।

मां की स्थिति में कोई भी औरत कमजोर हो जाती। और कदम उठा लेती, लेकिन वह एक मजबूत महिला थीं। कभी भी मुझे दूसरी मां यहां जाने से नहीं रोका।

जब कभी मेरी मां बीमार हो जाती, तो महेश भट्ट भी उनसे मिलने हमारे घर आते। भी उन्हें उतना ही प्यार करती थी। मां को पूजा भट्ट से बहुत लगाव था। बहुत चिंता भी करती थी।

नहीं मेरी मां और मेरी सौतेली मां हर दिन एक दूसरे से बात भी करती थीं। बच्चों के बीच भी एक खामोशी की जुबान थी कि हमें साथ रहना है। पीछे मेरे पिता की भूमिका नहीं, बल्कि दोनों मांओं की भूमिका थी।

हम सौतेले भाई-बहन अगर आज भी एक हैं, तो उसमें मेरी मां और महेश की मां की भूमिका है।

2015  हेमलता भट्ट के साथ भाई महेश भट्ट।

2015 हेमलता भट्ट के साथ भाई महेश भट्ट।

मां का कहना था कि अच्छे से पढ़ो-लिखो और कोई बढ़िया नौकरी करो। चाहती थीं कि पापा की तरह मैं भी फिल्मों में जाऊं। 1968 मेरा ग्रेजुएशन हो गया। की आर्थिक स्थिति खराब थी। बिक थीं। की सख्त जरूरत थी।

मैंने एक कंपनी में 1600 रुपए महीने की सेल्समैन की नौकरी शुरू की। दवाइयां और नैपकिन बेचता था। बाद वापस मुंबई लौट आया। वजह थी एक लड़की के साथ अफेयर और चुपके से शादी।

मां ने पूछा क्या हुआ है, मैंने कहा कि कुछ नहीं, नौकरी छोड़ दी है, यहां दूसरी नौकरी करुंगा। की तलाश करने लगा। एक दोस्त अमेरिका से भारत आया था।

वह कहने लगा कि रॉबिन तुम फिल्म लाइन में जाओ, तुम्हारा पूरा परिवार इस लाइन में है। मैंने कहा कि शुरुआत में मुझे पैसे नहीं मिलेंगे और मुझे पैसे चाहिए हैं, क्योंकि मैं शादी कर चुका हूं।

उसने कहा कि वह मुझे हर महीने 1000 रुपए देगा। गया। मुझे दोस्त से कभी पैसे लेने की जरूरत नहीं पड़ी। एक डायरेक्टर यहां असिस्टेंट डायरेक्टर का काम किया। डायरेक्टर नरेंद्र बेदी के साथ काम करने लगा।

काफी कुछ सीखने को मिला। लेकर डायरेक्शन का काम सीखा। , , तेरी कसम जैसी फिल्में बनाईं। चल था। एक मनहूस दिन नरेंद्र बेदी को हार्ट अटैक आया और उनकी मौत हो गई। ठप गया।

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आ रहा था कि क्या करें। एक दोस्त ने कहा कि शफी इनामदार नाम से नया एक्टर आया है, उसे एक सेक्रेटरी चाहिए। सुनकर जागी।

कि मैं ही यह नौकरी कर लेता हूं। उसने बोला कि अरे तू तो डायरेक्टर है यार, क्या करेगा यह सब करके। कहा कि डायरेक्टर को भी पैसों की जरूरत होती है। इनामदार का सेक्रेटरी हो गया।

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एक दिन मुझे महेश भटट् का फोन आया कि मिलने आओ। मैं मिलने गया, तो वे कहने लगे कि हम लोग अपना काम शुरू कर रहे हैं, तुम हमारे साथ आ जाओ। संभालने के लिए घर का आदमी चाहिए। बाद हमने अपने साथ मिलकर कब्जा, जुर्म और स्वयं जैसी फिल्में बनाईं।

रोज मुझे और महेश भट्ट को गुलशन कुमार ने अपने ऑफिस में बुलाया। कहा यह कैसेट ले लो, इसमें 11 गाने हैं। गानों पर एक प्रेम कहानी चाहिए।

महेश भट्ट ने मना कर दिया, लेकिन मैं जानता था कि मेरे पास अगले 6 महीने तक कोई काम नहीं है। मनाया और किसी तरीके से हां करवा दिया। से आने के बाद वे कहने लगे कि तुम यह कैसेट सुनो और देखो क्या हो सकता है, तुमने ही हां की है।

फिल्म की कहानी भी ऐसी होनी चाहिए थी कि कहीं से गानों को न तो डॉमिनेट करे और न कमजोर हो। मैंने कभी कहानी लिखी नहीं थी। समझ ही नहीं आ रहा था कहां से शुरू करूं।

1993 है।  फिल्म गुमराह की शुटिंग के दौरान मैं, भूषण पटेल, महेश भट्ट, संजय दत्त और यश जौहर।

1993 है। फिल्म गुमराह की शुटिंग के दौरान मैं, भूषण पटेल, महेश भट्ट, संजय दत्त और यश जौहर।

भट्ट के पास आकाश खुराना नाम के एक बहुत पढ़े लिखे और समदार व्यक्ति आया करते थे। उन्हें मनाया कि वह फिल्म लिखने में मेरी मदद करें। गए। से मैंने पहली फिल्म लिखी आशिकी।

फिल्म राइटर पहचान देने वाली फिल्म थी ये। तो हमारे पास प्रोड्यूसर्स की लाइन लग गई। , सड़क, दिल है कि मानता नहीं सब एक के बाद एक हिट।

सुपर रही। मैंने जब बाजीगर लिखी तो इसके लिए सलमान खान, अक्षय कुमार सभी ने मना कर दिया। था कि हीरो विलेन कैसे हो सकता है।

शाहरुख खान से मेरी मुलाकात हुई। कहानी सुनाई तो उन्होंने हां कर दी। बाजीगर बनी और सारे रिकॉर्ड टूट गए। फेयर मिला।

हूं। चुभ हैं। बाजीगर को फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला, तो अवॉर्ड लेने स्टेज पर गया, लेकिन मुझे एक शब्द नहीं बोलने दिया गया।

से माइक छीन लिया गया। मुझे उस अवॉर्ड की कोई खुशी नहीं हुई, क्योंकि मुझसे मेरी खुशी छीन ली गई।

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इसके बाद मैंने तय किया कि हम ऐसे अवॉर्ड शुरू करेंगे, जिसे फिल्म राइटर फिल्म राइटर को देंगे। बांटेंगे भी, भी और बोलेंगे भी। क्रम में स्क्रीनराइटर एसोसिएशन ने अपना अवॉर्ड प्रोग्राम शुरू किया।

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अपनी फिल्मों के कैरेक्टर असल जिंदगी से ही लेता था। प्लास्टिक के कैरेक्टर नहीं गढ़े। होगी। उसमें हीरो घर का बिजली का बिल भरना भूल जाता है और उसके घर की बत्ती चली जाती है। कहानी थी। मां जब भी बिजली का बिल भरने के लिए पैसे देती, तो मैं बिल भरना तो नहीं भूलता था, लेकिन वो पैसे खर्च कर देता था।

पूछतीं कि क्या हुआ बिल क्यों नहीं भरा? मैं बता देता था कि इसमें से 12 रुपए खर्च हो गए हैं। चाहे कुछ भी हो मैं मां से झूठ नहीं बोल सकता था, क्योंकि उन्हें झूठ से चिढ़ थी। मुझसे कहती थीं ‘देखो मुझसे कभी झूठ मत बोलना।’ यह बात ऐसी गांठ बांधी की आज तक साथ है।

महेश भट्ट, आलिया भट्ट और उसकी मां सोनी राजदान।

महेश भट्ट, आलिया भट्ट और उसकी मां सोनी राजदान।

भट्ट ने ये सारी बातें भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से शेयर की हैं

अब संडे जज्बात सीरीज की ये 3 कहानियों से होकर भी गुजर जाइए

1. से इतना डर ​​​​ हूं कि जिंदगी को हर पल जी लेना चाहती हूं। रहूंगी या नहीं, नहीं पता

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राजपूत, की रहने वाली हूं। के रूप में पहचान है मेरी। रतन सिंह कमिश्नर थे और मां हाउस वाइफ। सब कुछ अच्छा अच्छा चल रहा था, फिर जिंदगी ने ऐसी करवट ली कि सब कुछ बदल गया। पहले मेरी दोस्त प्रत्युषा बनर्जी यानी बालिका वधू की मौत हुई, उसके बाद पापा चल बसे। (पढ़िए पूरी )

2. किन्नर से महामंडलेश्वर बनी, आज भी भीड़ में लोग हाथ दबा देते हैं, सोशल मीडिया पर बोलते हैं- अच्छी वाली फोटो भेजो

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ने ही मेरा यौन शोषण किया। आत्महत्या की कोशिश की। में काफी मार-पीट हुई। प्यार भी किया, लेकिन वफा के नाम पर मुझे धोखा मिला, वो भी चार दफा। माया छोड़कर निकल पड़ी अपनी नई दुनिया बनाने। के हरिगिरी महाराज से दीक्षा ली और संन्यासी बन गई। मैं किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर हूं, नाम है पवित्रानंद नीलगिरी। (पूरी कहानी )

3. पेट पालने के लिए रेप तक झेला:आंटी ने अधेड़ के हाथों बेच दिया, फिर बनी किन्नर महामंडलेश्वर, मेरे ऊपर फिल्म बन रही

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अखाड़ा की महामंडलेश्वर हिमांगी सखी। पहली किन्नर, जो दुनियाभर में भागवत गीता, शिव पुराण और गरुड़ पुराण की कथा करती हूं। पापा फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर, मोहन स्टूडियो में पार्टनर और विश्वकर्मा फिल्म्स कंपनी के मालिक थे। थीं। मैंने रेखा, अमिताभ बच्चन, जितेंद्र और संजय दत्त जैसे सेलिब्रिटीज को बहुत करीब से देखा है, लेकिन ठाठ-बाट के ये दिन ज्यादा समय तक नहीं रहे। ने ऐसी करवट ली कि मुझे भीख तक मांगना पड़ा। (पूरी खबर )

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