Wednesday, October 5, 2022
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति में अंग्रेजी अब जरूरी नहीं

संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह में राज्यपाल और अखिल भारतीय संगठन मंत्री ने रखे विचार

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शिक्षा नीति 2020 शिक्षा के माध्यम में मातृभाषा की अनिवार्यता पर बल देती है। में प्रारंभिक शिक्षा देश में ऐसी शिक्षा व्यवस्था का निर्माण करेगी जो उर्वर मस्तिष्क की रचना करेगी न कि छात्रों को नोट छापने की मशीन बनाएगी। ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत विश्व के शीर्ष सौ विश्वविद्यालय भारत में अपने केंद्र स्थापित करेंगे। भारत के शीर्ष सौ विश्वविद्यालय दुनिया के अलग देशों में अपने केंद्र स्थापित करेंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एक राष्ट्रीय पहल है जो ग्राम को महानगरों तक, हाशिये से शीर्ष तक और गरीब से अमीर वर्ग तक समान शिक्षा व सकारात्मक विचारों को गति देती है। क्षेत्रीय भाषा बोलियों को प्राथमिकता देने का कार्य करती है। शिक्षा के लिए आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना, समान अवसर प्रदान करना तथा प्रत्येक की प्रतिभा को उचित मंच प्राप्त हो इसका विशेष ध्यान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में रखा गया है। उपरोक्त बातें हिंदी विभाग, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय तथा संपर्क विभाग, भारतीय शिक्षण मंडल के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह में मुख्य वक्ता भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री मुकुल कानिटकर ने कही।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने अंग्रेजी की अनिवार्यता को अस्वीकार किया है। के मुख्य अतिथि राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति हमें औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त करने का काम करेगी। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित यह संगोष्ठी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से भारत के पारंपरिक पठन एवं शिक्षण प्रणाली को न केवल गतिशील बनाएगी अपितु उच्च शिक्षण संस्थानों में मानव कौशल के लिए आवश्यक तत्त्वों के सृजन हेतु बल प्रदान करेगी। भारतीय भाषाओं के विकास के लिए वरदान’ विषय पर विद्वानों ने अपने मत रखे। कार्यक्रम 23 से 25 तक चलेगा। में भारतीय शिक्षण मंडल सह संगठन मंत्री शंकरानंद, विश्वविद्यालय के अकादमिक एडीसी गंदर्भा राठौर, एसडीएम शिल्पी वेक्टा, हिंदी विभाग से डॉ. प्रजापति, . , . प्रीति सिंह, भारतीय शिक्षण मंडल के विभिन्न प्रांत से आए संपर्क अधिकारी समेत विश्वविद्यालय के सभी विभागों से आचार्यगण व विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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