Wednesday, October 5, 2022
HomeSportsम्यूनिख हत्याकांड 1972 की पूरी कहानी, पढ़ें इजरायल की मोसाद ने कैसे...

म्यूनिख हत्याकांड 1972 की पूरी कहानी, पढ़ें इजरायल की मोसाद ने कैसे लिया ओलंपिक एथलीट्स की मौत का बदला

नरसंहार को पांच दशक हो चुके हैं पर जेहन से वह तस्‍वीर नहीं जाती। गांव की बालकनी में नकाब पहने खड़ा फलस्‍तीनी आतंकवादी जैसे पूरी दुनिया को मुंह चिढ़ा रहा था। खेल गांव में खिलाड़ी बनकर घुसे आतंकियों ने रक्‍तपात से अपनी मांगें बनवानी चाही थीं मगर सामने इजरायल था। s जर्मनी ने बंधकों को ले जाने के लिए आतंकियों को बस मुहैया कराई मगर इजरायल ने रेस्‍क्‍यू मिशन लॉन्‍च कर दिया। पर हमला होते देख आतंकियों ने इजरायली ओलिंपिक टीम पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। 5-6 सितंबर 1972 के बीच इजरायली टीम के 11 खिलाड़ियों का बेरहमी से कत्ल कर दिया गया। दुनिया शोक में डूबी थी और इजरायली बदले की आग में जल रहे थे। गया मोसाद को, की खुफिया एजेंसी। मोसाद ने करीब-करीब दो दशक तक एक-एक आतंकवादी को चुन-चुनकर मारा। 2005 मोसाद के इसी ऑपरेशन पर ‘म्‍यूनिख’ नाम की फिल्‍म बनी।

में घुस गए आतंकी और फिर…

का म्‍यूनिख शहर 1972 के ओलिंपिक खेलों के आयोजन के लिए चुना गया था। हिटलर की सरपरस्‍ती में यहूदियों के नरसंहार के बाद यह पहला मौका था जब जर्मनी में ओलिंपिक खेल हो रहे थे। 5 सितंबर की सुबह ‘ब्‍लैक सेप्‍टेम्‍बर’ नाम के फलस्‍तीनी समूह के 8 आतंकवादी खेल गांव में घुसे। ट्रैकसूट पहने खिलाड़‍ियों के अंदाज में वे उस इमारत में दाखिल हुए जहां इजरायली दल को ठहराया गया था।

इजरायली एथलीट्स को खोजने में लग गए। -एक कमरे की तलाशी ली गई। इस बीच, इजरायल की रेसलिंग टीम के कोच मोसे वेनबर्ग ने किचन से चाकू उठाकर आतंकियों का मुकाबला करना चाहा मगर उन्‍हें गोली मार दी गई। बारिश के बीच कई खिलाड़ी भाग निकले।

अचानक हुए हमले में दो खिलाड़ी मारे गए जबकि नौ को आतंकियों ने बंधक बना लिया। खिलाड़‍ियों को म्‍यूनिख में बंधक बनाए जाने की खबर पूरी दुनिया में फैल गई। इस वक्‍त तक सबको यही पता था कि 11 खिलाड़ी बंधक बनाए गए हैं, जो कि सच नहीं था।

See also  bihar politics amit shah called nitish kumar two days before to break alliins with bjp says sushil modi - India Hindi News - दो दिन पहले अमित शाह ने नीतीश को किया था फोन, सुशील मोदी ने बताया

आगे झुका नहीं इजरायल

93996472

उसी इमारत में 9 इजरायली खिलाड़‍ियों को बंधक बनाने के बाद आतंकियों ने अपनी मांगें सामने रखीं। वे इजरायल की जेलों में कैद 234 फिलिस्तीनियों की रिहाई चाहते थे। साफ इनकार कर दिया। आतंकियों ने दबाव बढ़ाने के लिए, जिन दो खिलाड़‍ियों की मौत हो चुकी थी, उनके शव नीचे फेंक दिए। था कि अगर मांग नहीं मानी तो और लाशें गिरेंगी। की तत्‍कालीन प्रधानमंत्री गोल्‍डा मेयर ने आतंकवादियों के आगे घुटने टेकने से दो टूक मना कर दिया। , जर्मनी अपने स्‍तर से पूरे संकट को सुलझाने की कोशिश में था।

उन 11 इजरायली प्‍लेयर्स में से कोई नहीं बचा

-11-

जर्मनी ने आतंकवादियों की यह बात मान ली कि वे बंधकों को साथ लेकर कायरो जाएंगे। बस मुहैया कराई गई जिसमें बंधकों को लेकर वे पास के एयरपोर्ट पहुंचे। में बंधकों को छुड़ाने की योजना बनाई गई। पुलिस की कोशिशें नाकाम साबित हुईं। ही हथियारबंद गाड़‍ियों पर आतंकियों की नजर पड़ी, वे घबरा गए। 6 सितंबर की रात करीब 12 बजकर 4 मिनट पर एक आतंकवादी ने एके-47 राइफल उठाई और पॉइंट-ब्‍लैंक रेंज से इजरायली एथलीट्स पर गोलियां बरसां दीं। गए सभी इजरायली एथलीट्स को मौत के घाट उतार दिया गया। भी जवाब में गोलियां बरसाईं और सारे आतंकवादियों को मार गिराया। पुलिस ने तीन संदिग्‍धों को मौके से पकड़ा जिनकी तस्‍वीरें अगले स्‍लाइड में।

ने शुरू किया ऑपरेशन Wrath of God

-wrath-of-god

के ह‍त्‍थे ये तीन संदिग्‍ध लगे। , इजरायल ने बदले की प्‍लानिंग शुरू कर दी थी। पीएम गोल्डा मेयर ने मोसाद की ओर से सुझाए एक ऑपरेशन को मंजूरी थी। नाम था Wreck of God, दुनिया इस ऑपरेशन को Operation Bayonet के नाम से भी जानती है। मोसाद ने अगले 20 साल तक म्‍यूनिख हमले से जुड़े आतंकवादियों को चुन-चुनकर मार गिराया। मशहूर फिल्‍म डायरेक्‍टर स्टीवन स्पीलबर्ग ने मोसाद के इसी ऑपरेशन पर ‘म्‍यूनिख’ नाम की फिल्‍म बनाई जो 2005 में रिलीज हुई थी। स्‍लाइड्स में मोसाद के इस ऑपरेशन की पूरी कहानी

See also  नेहरू ने कभी यहां की चारदीवारी में लिखी थी 'किताब'.. यूपी की नैनी जेल, जहां कैदी जगा रहे शिक्षा की अलख

एक-एक कर मोसाद ने आतंकियों को उतारा मौत के घाट

93996899

के महीने भर बाद ही मोसाद को पहली कामयाबी मिली। में रह रहे फ‍िलिस्‍तीनी ट्रांसलेटर अब्दुल वाइल जैतर को 16 अक्‍टूबर 1972 को मारा गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह जैसे ही डिनर करके लौटा, पहले से मौजूदा दो एजेंट्स ने गोलियों से भून दिया।

अगला डॉ. s वह फ्रांस में फिलिस्तीन लिब्रेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) का प्रतिनिधि था। एक एजेंट ने पत्रकार बनकर हमशरी को अपने जाल में फंसाया। पैरिस स्थित उसके अपार्टमेंट से बाहर बुलाया गया। बाहर आते ही मोसाद की एक टीम भीतर घुसी और डेस्क टेलीफोन के नीचे बम लगा दिया। November 8, 1972 को उसी ‘पत्रकार’ ने हमशरी को फोन किया। हमशरी ने उठाया जिससे कन्‍फर्म किया गया कि वह कमरे में ही मौजूद है। ने एक सिगनल भेजा और बम फट गया। हमशरी की मौत नहीं हुई लेकिन वह बुरी तरह घायल हो गया और करीब एक महीने बाद दम तोड़ दिया।

महीनों के अंदर चार अन्य संदिग्ध मारे गए। उनके नाम थे- बासिल अल कुबैसी, हुसैन अब्दुल चिर, जैद मुकासी और मोहम्मद बौदिया।

Wrath of God का सबसे खतरनाक मिशन

wrath-of-god-

1973 में मोसाद ने बेहद खतरनाक मिशन को अंजाम दिया। की हिटलिट में शामिल ज्‍यादातर लोग लेबनान में कड़ी सुरक्षा के बीच रहते थे। ने ऑपरेशन ‘स्प्रिंग ऑफ यूथ’ चलाकर उन्‍हें निशाना बनाया। November 9, 1973 की रात इजरायली कमांडोज को पानी और जमीन के रास्ते बेरूत पहुंचाया गया। वहां मौजूद मोसाद एजेंट से कॉन्‍टैक्‍ट के बाद कमांडो टीम ने पूरे शहर में छापे मारे। इजरायली पैराट्रूपर्स की एक टीम ने पॉप्युलर फ्रंट फॉर लिब्रेशन ऑफ फिलिस्तीन (PFLP) के हेडक्‍वार्टर पर हमला बोला। इस ऑपरेशन में मोहम्मद यूसुफ अल नज्जर, कमल अदवान और कमल नासिर को मार गिराया गया।

See also  Shane Watson Picks His Top 5 Best T20I Playersfrom His Dream Team To ICC Website Pakistani Batter Babar Azam As Best T20I Player Ahead Of Virat Kohli, Rohit Sharma

आग में जल रहे मोसाद एजेंट्स से एक चूक हो गई। के करीब एक महीने बाद मोसाद को इनपुट मिला कि हमले का मास्टरमाइंड अली हसन सलामे नॉर्वे के लिलेहैमर में रह रहा है। November 21, 1973 को मोसाद के एजेंटों ने हमला किया मगर जिसे मारा वह मोरक्को का एक वेटर अहमद बौचिकी था। बौचिकी का म्यूनिख हमले और ब्लैक सेप्टेम्बर से कुछ लेना-देना नहीं था। पुलिस ने मोसाद के छह एजेंट्स को अरेस्‍ट कर लिया। का मानना ​​​​ कि सलामत ने उनको चकमा दिया था। पुलिस की जांच में यूरोप भर में फैले मोसाद के एजेंटों का पता चला। इसके बाद इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव पड़ा और कुछ समय के लिए ऑपरेशन Wrath of God को टाल दिया गया।

गया म्‍यूनिख हत्‍याकांड का मास्‍टरमाइंड

93997312

करीब पांच साल बाद इजरायल ने Wrath OF God को फिर शुरू किया। ‘रेड प्रिंस’ के नाम से मशहूर अली हसन सलामे का पता मोसाद ने खोज ही निकाला। में ही रह रहा था। चैम्बर्स नाम की मोसाद एजेंट ब्रिटिश पासपोर्ट पर लेबनान पहुंची। एरिका ने उसी गली में किराये पर कमरा लिया जिससे होकर सलामे आता-जाता था। वक्‍त में मोसाद के दो और एजेंट्स बेरूत पहुंच गए। एक कार खड़ी कर दी गई। विस्फोटक सामग्री भरी थी। को ऐसी जगह पर खड़ा किया गया था कि कमरे से दिख सके। November 22, 1979 को जब सलामे और उसके बॉडीगार्ड्स कार में गली के भीतर दाखिल हुए तो विस्‍फोटकों वाली गाड़ी को मोसाद ने रेडियो डिवाइस से उड़ा दिया। मोसाद ने म्‍यूनिख के मास्‍टरमाइंड को ठिकाने लगा ही दिया। इसके बाद भी अगले एक दशक तक मोसाद ने नरसंहार से जुड़े लोगों को ढूंढ-ढूंढकर मारा।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments