Friday, September 30, 2022
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बंटवारे में पाकिस्तान चला गया था मुस्लिम परिवार; भाई भारत रुका, उसे सिख परिवार ने पाला | Pakistan’s Gurdwara Darbar Sahib; Muslim Sister Meets Sikh Brother After 75 Years

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दिल्ली12

पाकिस्तान स्थित श्री करतारपुर साहिब में बुधवार को एक भाई अपनी बहन से पहली बार मिला। सिख भाई और मुस्लिम बहन को लिपटकर फूट-फूटकर रोते देख वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें भर आईं। कहानी लोगों को पता चली तो वह और भावुक हो गए। परिवार 1947 के बंटवारे में बिछड़ गया था।

हैं इस परिवार के बिछड़ने की कहानी
65 साल की कुलसुम पाकिस्तान के फैसलाबाद में रहती हैं। परिवार 1947 के बंटवारे में जालंधर छोड़कर पाकिस्तान आ गया था। कुलसुम ने बताया- वह बंटवारे के दस साल बाद पाकिस्तान में ही पैदा हुईं। उनके माता-पिता ने बताया था कि- बंटवारे के दौरान उनके भाई और बहन जालंधर में ही छूट गए थे। जब भी मां को अपने लापता बच्चों की याद आती, तो वह बहुत रोती थीं। उन्होंने कहा कि उम्मीद नहीं थी कि वह कभी अपने भाई और बहन से मिल पाएंगी।

सिंह अपनी बहन से मिलने के लिए अटारी-वाघा बॉर्डर से पाकिस्तान स्थित करतारपुर साहिब पहुंचे।

दोस्त पाकिस्तान आए तो लगी परिवार की जानकारी
ने बताया कि कुछ साल पहले उनके पिता के एक दोस्त सरदार दारा सिंह भारत से पाकिस्तान आए और उनसे मिले। मां ने उन्हें भारत में खोए अपने बेटे और बेटी के बारे में बताया और अपने गांव का पता भी दिया। से भारत लौटकर सरदार दारा सिंह ने जालंधर के पडावां गांव में उनके घर का दौरा किया और लापता बच्चों के बारे में जानकारी दी।

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सरदार दारा सिंह ने उनकी मां को बताया कि उनका बेटा जीवित है और एक सिख परिवार के साथ रह रहा है, जबकि उनकी बेटी की मौत हो चुकी है।

इस साल पाकिस्तान के फैसलाबाद में रहने वाले मोहम्मद सदीक और भारत से श्री करतारपुर साहिब पहुंचे मोहम्मद हबीब आका उर्फ ​​​​ 75 साल बाद करतारपुर में मिले थे।  ने सभी को भावुक कर दिया था।

इस साल पाकिस्तान के फैसलाबाद में रहने वाले मोहम्मद सदीक और भारत से श्री करतारपुर साहिब पहुंचे मोहम्मद हबीब आका उर्फ ​​​​ 75 साल बाद करतारपुर में मिले थे। ने सभी को भावुक कर दिया था।

सिख बने अमरजीत सिंह
दारा सिंह ने बताया- उनके बेटे का नाम अमरजीत सिंह है, जिसे 1947 में एक सिख परिवार ने गोद लिया था। की जानकारी मिलने के बाद कुलसुम ने अमरजीत सिंह से वॉट्सएप पर संपर्क किया और बाद में मिलने का फैसला किया। वहीं, अमरजीत सिंह ने कहा कि जब उन्हें पहली बार पता चला कि उनका असली परिवार पाकिस्तान में है और जिंदा है तो उन्हें बहुत खुशी हुई। से अपने सगी बहन और भाइयों से मिलना चाहते थे।

होशियारपुर से सुनीता देवी अपने परिवार के साथ करतारपुर जाकर अपने रिश्तेदारों से 43 साल बाद मिली थीं।  बंटवारे के समय सुनीता के पिता भारत में ही रह गए थे और बाकी परिवार पाकिस्तान चला गया था।

होशियारपुर से सुनीता देवी अपने परिवार के साथ करतारपुर जाकर अपने रिश्तेदारों से 43 साल बाद मिली थीं। बंटवारे के समय सुनीता के पिता भारत में ही रह गए थे और बाकी परिवार पाकिस्तान चला गया था।

-बहन लिपटकर खूब रोए
सिंह अपनी बहन से मिलने के लिए अटारी-वाघा बॉर्डर से पाकिस्तान स्थित करतारपुर साहिब पहुंचे। वहीं, कुलसुम अपने बेटे शहजाद अहमद और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ फैसलाबाद से आईं। दोनों भाई-बहन जैसे ही मिले, लिपटकर खूब रोने लगे।

सिंह ने कहा कि वह अब अपने परिवार के साथ समय बिताने के लिए पाकिस्तान आएंगे। साथ ही उन्हें भी भारत ले जाएंगे, ताकि वे अपने सिख परिवार से मिला सकें। दोनों भाई-बहन एक-दूसरे के लिए ढेर सारे तोहफे भी लाए थे। यह पहली बार नहीं है, जब करतारपुर कॉरिडोर एक परिवार को फिर से मिला है। इससे पहले मई में, एक सिख परिवार में जन्मी एक महिला, जिसे एक मुस्लिम दंपति ने गोद लिया और पाला था, करतारपुर में भारत के अपने भाइयों से मिली।

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