Saturday, October 8, 2022
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ग्रामीण भारत नौकरी ही नहीं पढ़ाई के लिए भी विदेश जाने की होड़ में शामिल, लेकिन क्यों? जानें

हाइलाइट्स

के छात्रों पर विदेशी विश्वविद्यालयों का फोकस
खर्च कर बच्चों को शिक्षा के लिए विदेश भेज रहे लोग
अमेरिका के मुकाबले कनाडा की ओर ज्यादा झुकाव

. खुशी कभी ग़म फिल्म में जॉनी लीवर उसकी और बेटा एक जगह संयोग रितिक रोशन को मिलते , वह उनसे जानना चाहता है क्या उसके भाई का कुछ है. मशक्कत करने भी जब जॉनी और उसकी मुंह नहीं हैं तो उनका बेटा , लोग अमेरिका हैं, और आगे कहता है भी एक दिन जाऊंगा. विदेश जाना, बसना, पढ़ना अधिकांश भारतीयों का सपना रहा है, लेकिन पहले यह सिर्फ चंद लोगों करना हर के बस नहीं थी. लेकिन हाल ही में आई एक रिपोर्ट बताती है कि अब ग्रामीण भारत के अपना कुछ दांव पर लगाकर बच्चों विदेश पढ़ने भेज हैं. जो सबसे अहम वजह है, वह है भारत में से लेकर कम होती संभावनाएं.

विदेश जाने वालों का गढ़ रहा है. यहां से लोग काम पर जाते थे, लेकिन अब पढाई करने के लिए भी जा रहे हैं. बात यह है कि वह लोग शामिल हैं, संपन्न परिवार से नहीं है. वजह है कि दिल्ली से महज 250 किमी की दूरी पर मौजूद अंबाला में वीजा सलाहकारों का व्यवसाय पनप गया है. बच्चे ऐसे होते हैं जिनके परीक्षा में ग्रेड कम आते हैं उन्हें किसी अच्छे कॉलेज में दाखिला नहीं मिल पाता है. दिल्ली का हाल तो सभी को पता है, यहां तो यह आलम है कॉलेज की कट ऑफ लिस्ट 100 तक गई है. सामान्य नंबर हासिल करने वाले छात्रों के पास विकल्प के पर कुछ नहीं बचता है.

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भले ही पढ़ाई में बहुत हो, ज्यादातर यह रहता है करके भरपाई पढ़ाई के लेंगे. कई देशों में कोविड पाबंदी हटाए जाने के बाद से ही, अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूके, आयरलैंड और न्यूजीलैंड जैसे देशों में 2022 की शुरूआत में जाने वाले छात्रों की संख्या करीब करीब 10 लाख थी, जो सरकारी और औद्योगिक अनुमान के हिसाब से महामारी की में है.

में कई , इंग्लिश प्रवीणता परीक्षण, चयन की सेवा, आवेदन प्रक्रिया, और लिए व्यवस्था भी करती है. रॉयटर्स के मुताबिक में केटरियोना जो ऑस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय की कार्यकारी अधिकारी हैं, उनका कहना है कि वर्तमान में 76000 छात्र अध्ययनरत हैं, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद इसकी संख्या बढ़ने की उम्मीद है.

लोग देश में घटते रोज़गार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वीजा प्रक्रिया में ढील दिए जाने की वजह से छोटे कोर्स में आवेदन कर रहे हैं. विदेशों में शिक्षा का बाज़ार एक अनुमान के मुताबिक 30 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2024 तक 80 डॉलर तक जा सकता है. मामले में वीजा का है कि में निजी शिक्षा के दाम बढ़ोतरी, की घटती अपनी संपत्ति लेकर बच्चों को विदेश पढ़ने भेज रहे हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि इस डॉलर के मुकाबले रुपए में 7 फीसद की गिरावट आने के बावजूद परिवार बच्चों को बाहर भेजने की हिम्मत कर रहे हैं.

उम्मीद
विदेशी विश्वविद्यालय अपने स्थानीय साझेदारों के साथ मिलकर पांच सितारा में शिक्षा मेला आयोजित कर रहे , इसके साथ ही सत्रों के जरिए भी छात्रों को लुभाया जा रहा है. बताती है कि ऐसे ही एक शिक्षा मेले चंडीगढ़ के एक महंगे होटल ऑस्ट्रेलिया और कनाडा से आए आए संभावनाएं तलाशने के लिए करीब ज्यादा छात्र इकट्ठा हुए थे. सुविधा बढ़ जाने की वजह से वीजा कंसलटेंसी भी ग्रामीण में नई तलाश रही हैं. और अब पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.

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भारत में करीब 30 करोड़ छात्र स्कूलों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और बड़ी संख्या उच्च शिक्षा प्राप्त करने की दिशा में है. वहीं भारत में सभी युवाओं को शिक्षा मुहैया कराने के लिए पर्याप्त कॉलेज है, ही रोज़गार की कमी एक बड़ी समस्या है.

आकर्षित होने की वजह
बाद से ही चीनी की संख्या कमी आई है, जिस वजह से भारत की ओर सभी और यह के लिए भी एक सुनहरा अवसर है. साथ ही भारतीय छात्रों के लिए यूके और अमेरिका की तुलना में कनाडा में स्नातक के काम और निवास ज्यादा लचीला है. वजह है कि कनाडा के विश्वविद्यालय भारत के इलाकों में विदेशी शिक्षा की मांग को पूरा करने और आईडीपी अंतरराष्ट्रीय सलाहकार के साथ गठजोड़ कर रहे हैं.

यह एजेंसी साल भर में करीब 8 से 10 मेलों का आयोजन करती हैं, जिसमें सितंबर में होने वाला एक सम्मेलन और के लिए एक बड़ा सम्मेलन शामिल है. यही नहीं कनाडा जाने की एक वजह यह भी है कि यहां के शिक्षा यूके, और अमेरिका तुलना में काफी सस्ते भी हैं. में अंतर्राष्ट्रीय स्नातक ट्यूशन फीस औसतन 20 लाख रू सालाना होती है.

Tags: Aatmanirbhar Bharat, Canada, Education

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