Thursday, February 2, 2023
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क्लास रूम टीचिंग पर जोर,स्टडी कैलेंडर में फेरबदल पर रोक, शासन से जारी हुए निर्देश | Emphasis on class room teaching, ban on reshuffle in study calendar, instructions issued by the government

लखनऊ4

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यूपी के महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरण आनंद ने परिषदीय स्कूलों के संचालन से जुड़े अहम दिशा निर्देश जारी किए हैं।

स्कूलों में पढ़ाई के समय किसी भी शिक्षक को परिसर से बाहर जाने पर मनाही होगी। में टीचर के पहुंचने और जाने का समय भी निर्धारित किया गया हैं। शिक्षक को क्लास शुरू होने से 15 मिनट पहले पहुंचना होगा और शिक्षण अवधि के बाद भी कम से कम 30 मिनट तक रुक कर रजिस्टर में अपडेट के साथ अगले दिन की प्लानिंग भी मेंशन करना होगा।

अलावा वीकली प्लानिंग को भी फॉलो करना होगा और स्टडी कैलेंडर के शेड्यूल में बदलाव होने पर भरपाई के लिए एक्स्ट्रा क्लास भी तय करना होगा। इसके अलावा क्लास रूम टीचिंग के निर्धारित समय रैली, प्रभात फेरी, मानव श्रृंखला और गोष्ठी का आयोजन नहीं होगा। छात्रों के पठन पाठन को लेकर सजग मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा की तरफ से प्रदेश के सभी अधिकारियों को इसे अमल का निर्देश निर्देश दिया गया है।

स्कूलों में सबसे ज्यादा फोकस क्लास रूम टीचिंग पर होगा

स्कूलों में सबसे ज्यादा फोकस क्लास रूम टीचिंग पर होगा

75 में करना होगा फॉलो

महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरण आनंद की ओर से जारी दिशा में कहा गया है कि टाइम एंड मोशन स्टडी के आधार पर विद्यालयों में शैक्षणिक कार्यों के लिए समय अवधि और कार्य निर्धारण को लेकर की जा रही कार्यवाही संतोषजनक नहीं है। सभी बेसिक शिक्षा अधिकारी अपने जनपद में इनका अनुपालन सुनिश्चित कराएं।

20 होगी रिपोर्ट

डीजी स्कूल शिक्षा विजय किरण आनंद ने प्रदेश के सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों से स्कूलों में पढ़ाई के घंटे समेत सभी शैक्षणिक कार्यों के लिए निर्धारित समय-सारिणी के पालन के संबंध में 20 नवंबर तक रिपोर्ट मांगी है।

शासनादेश में प्रत्येक शैक्षिक सत्र में 240 शिक्षण दिवस का संचालन किया जाना अनिवार्य है। इसी तरह निशुल्क पाठ्य पुस्तक वितरण, डीबीटी और अन्य किसी भी सामग्री के वितरण का कार्य विद्यालय अवधि के बाद ही किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।

हर स्कूल में साल में 240 दिन क्लास रूम टीचिंग के लिए अनिवार्य किए गए हैं।

हर स्कूल में साल में 240 दिन क्लास रूम टीचिंग के लिए अनिवार्य किए गए हैं।

शैक्षणिक कार्य के दौरान नहीं होगी रैली-गोष्ठी

पत्र में ये भी निर्देश दिया गया है कि विद्यालयों में शैक्षणिक कार्य की अवधि में रैली, प्रभात फेरी, मानव श्रृंखला और नवाचार गोष्ठी का आयोजन भी नहीं हो सकेगा। दौरान शिक्षकों से किसी भी विभाग का हाउस होल्ड सर्वे भी नहीं कराया जाएगा। विद्यालयों में शिक्षकों के गैरहाजिर मिलने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और वेतन भी कटेगा।

राज्य परियोजना कार्यालय और एससीईआरटी के प्रशिक्षणों में शामिल होना होगा। या विकासखंड स्तर पर बीएसए या खंड शिक्षा अधिकारी किसी भी प्रकार का प्रशिक्षण आयोजित नहीं करेंगे। आयोजित करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पाठ्यपुस्तक सहित अन्य सामग्री का वितरण शिक्षण अवधि के बाद ही किया जाएगा। परिषदीय शिक्षकों को जिला प्रशासन, बीएसए दफ्तर और खंड शिक्षा अधिकारी दफ्तर में संबद्ध नहीं किया जाएगा।

एक बार प्रधानाचार्य के साथ हो बैठक

संबंधित बैंकिंग कार्यों हेतु ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध है। अतः बैंकिंग और अन्य कार्यों या पासबुक में एंट्री या ग्राम प्रधान से वार्ता और समन्वय के लिए शिक्षण अवधि में शिक्षक विद्यालय परिसर से बाहर नहीं जाएंगे।

शिक्षकों के वेतन, अवकाश, मेडिकल से संबंधित समस्त कार्यों के ऑनलाइन वर्क के लिए मानव संपदा पोर्टल की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। संबंधी किसी कार्य के लिए शिक्षकों द्वारा खंड शिक्षा अधिकारी या जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से संपर्क नहीं किया जाएगा। सप्ताह में कम से कम एक बार प्रधानाध्यापक की अध्यक्षता में विद्यालय के सभी शिक्षकों की बैठक होना जरूरी हैं। इस बैठक में अगले सप्ताह की कार्ययोजना और विकासखंड स्तर मासिक समीक्षा बैठकों के निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा की जाएगी।

न नुकसान

टाइम एंड मोशन स्टडी के आधार पर विद्यालयों में शैक्षणिक कार्यों के लिए समय अवधि एवं कार्य निर्धारण के संबंध में 14 अगस्त 2020 को शासनादेश जारी किया गया था। में कहा गया था कि शैक्षणिक समय के अंतर्गत उल्लिखित समयानुसार प्रार्थना सभा / योगान्यास अवश्य कराया जाए। जिला प्रशासन, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा अपने स्तर से किसी तरह की परीक्षा आदि का आयोजन नहीं किया जाएगा। शैक्षणिक वातावरण को बनाने के लिए अभिनव प्रयास किए जाएं। साथ ही यह भी अवश्य सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी ऐसी गतिविधि या क्रियाकलाप का आयोजन न किया जाए जिससे कि पठन-पाठन प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो।

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