Friday, September 30, 2022
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क्या पुरानी कारों में भी लगवा सकते हैं एयरबैग्स? जानें- क्या है प्रोसेस और कितना आएगा खर्च – Can you install airbags in a car without them know your answer here and cost of this job done tuts

हर साल सड़क दुर्घटनाओं (Traffic Accidents) में लाखों लोग अपनी जान गंवाते हैं. में सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने के मामले दुनिया के औसत से काफी अधिक है. है कि भारत सरकार देश में बिकने वाली कारों को सुरक्षित बनाने पर जोर दे रही है. इन सारी कवायदों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा है एयरबैग्स (Airbags) की. कारों में छह एयरबैग्स अनिवार्य बनाने जा रही है.

किसी दुर्घटना की स्थिति में एयरबैग तुरंत खुद ही खुल जाते हैं और के ड्राइवर समेत सवार लोगों की जान बचाते हैं. के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री की सड़क दुर्घटना में मौत बाद कार सेफ्टी को लेकर चर्चा बढ़ी हुई है. बीच बहुत सारे लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि क्या वे अपनी पुरानी कारों में बाहर से एयरबैग्स लगवा सकते हैं? बाद में एयरबैग्स लगवा पाना है तो इसमें कितना खर्च आता है? आपके इन्हीं सवालों का जवाब बताने जा रहे हैं…

एयरबैग्स डिस्कवरी

आपको ये बताते हैं कि एयरबैग्स किस तरह से अस्तित्व आए और ये काम कैसे करते हैं. एयरबैग डेवलप करने की कहानी में अमेरिका के जॉन हेट्रिक (John Hetrick) और जर्मनी के वाल्टर लिंडरर (Walter Linderer) का नाम आता है. लगभग एक ही समय में एयरबैग का डेवलपमेंट किया. अमेरिकी इन्वेन्टर हेट्रिक ने अगस्त 1952 पहले एयरबैग का डिजाइन तैयार किया और इसे अगस्त 1953 में पेटेंट मिल गया. वहीं जर्मन इन्वेन्टर लिंडरर ने अक्टूबर 1951 में ही पेटेंट के लिए फाइल किया, उन्हें नवंबर 1953 में पेटेंट मिल पाया. का डिजाइन मर्सिडीज (Mercedes) अपनी लग्जरी कारों में इस्तेमाल किया. हेट्रिक से प्रेरित होकर फोर्ड (Ford) और क्राइसलर (Chrysler) जैसी कंपनियों ने एयरबैग बनाए.

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काम करते हैं एयरबैग्स

की कोई टक्कर होती है, उसकी स्पीड तेजी से कम हो जाती है. एक्सेलेरोमीटर (Accelerometer) स्पीड में अचानक आए इस बदलाव को डिटेक्ट करता है. एक्सेलेरोमीटर एयरबैग के सर्किट लगे सेंसर को एक्टिवेट कर देता है. एयरबैग सर्किट सेंसर एक्टिवेट होते ही एक हीटिंग एलीमेंट के जरिए इलेक्ट्रिक करेंट देता है. के अंदर केमिकल विस्फोट होता है. होते ही एयरबैग के अचानक गैस बनने लगती है, नाइलॉन बना बैग तुरंत फूल जाता है. बैग ड्राइवर और कार सवारों को बॉडी या किसी सख्त चीज टकराने से बचाता है. भी तभी अच्छे से बचाव कर पाता है, कार चालक व सवार सीटबेल्ट ऑन रखते हैं.

होता है केमिकल का इस्तेमाल

शुरुआत में एयरबैग में सोडियम एजाइड (Sodium azide) यानी NaN3 केमिकल का इस्तेमाल किया जाता था. टक्कर की स्थिति में इग्नाइटर में बिजली दौड़ती थी और वह गर्म हो जाता था. गर्मी से सोडियम एजाइड सोडियम मेटल (Sodium metal) और नाइट्रोजन गैस (Nitrogen gas) में बदल जाता है. एयरबैग को पूरा खोल देता है. अभी कार कंपनियां एयरबैग में का करने लगी हैं, जो पहले की तुलना में और जल्दी गैस छोड़ता है. में बनने वाले गैस को लेकर इस बात का ध्यान रखा जाता है कि वह यात्रियों ऊपर कोई बुरा नहीं डालता हो. मुख्य तौर पर नाइट्रोजन का ही इस्तेमाल होता है.

से कम नहीं हैं एयरबैग्स

की संरचना की बात करें यह अपने आप में एक जटिल मशीन है, जिसमें कई सेंसरों की जरूरत पड़ती है. कंपोनेंट में क्लॉक स्प्रिंग, इम्पैक्ट सेंसर, इग्नाइटर, एसआरएस वार्निंग लाइट, सीट स्विच, पाइरोटेक्निक इन्फ्लेटर, ईसीयू और सीटबेल्ट प्रीटेंशर्स शामिल हैं. की लिस्ट देखकर इतना तो अंदाजा लग ही गया होगा कि एयरबैग के करने में सेंसरों यानी कम्प्यूटरों की जरूरत पड़ती है. साफ और सीधा मतलब ये हुआ कि एयरबैग कार के सामान्य प्रोडक्ट नहीं होकर सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट है. इस कारण पुरानी कारों में बाद में एयरबैग्स लगवाना काफी मुश्किल काम हो जाता है.

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एयरबैग्स जानलेवा

एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि सभी कारों के लिए एयरबैग्स अलग-अलग डेवलप और डिजाइन होते हैं. जिस कार में लगाया जाना है, उस मॉडल को पहले कई बार टेस्ट किया जाता है. से पता लगाया जाता है कि टक्कर की स्थिति में कार का रिस्पॉन्स क्या है. रिस्पॉन्स के हिसाब से सेंसर एयरबैग को किया जाता है. किसी अन्य मॉडल का एयरबैग मॉडल में लगा सकते हैं. पर एयरबैग सही से काम ही नहीं करेगा. पर या तो एयरबैग खुलेगा ही नहीं फिर ऐसा भी हो सकता कि सिर्फ ब्रेक मारने पर , काफी खतरनाक कई में जानलेवा साबित हो सकता है.

ज्यादा करने पड़ेंगे खर्च

सब जान लेने के बाद भी आप अगर चाहते हैं कि आपकी पुरानी कार में एयरबैग ही जाए तो एक उपाय है. आप अपनी पुरानी कार में एक एयरबैग लगवा हैं, ऐसा भी है इस एक को कीमत आपकी कार की कीमत से भी ज्यादा हो जाए. कार की पुरानी स्टियरिंग को स्टियरिंग लगवा सकते हैं, एयरबैग फिटेड हो. कुछ ही कारों में संभव है. इसकी लागत की बात करें तो आपको 4 से 5 लाख रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं. इतना भारी-भरकम खर्च करने के बाद भी सेफ्टी की गारंटी नहीं मिलेगी, क्योंकि ऊपर हम आपको बता मॉडल के एयरबग को तरीके से डिजाइन किया जाता है.

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