Wednesday, November 30, 2022
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कुड़मी-आदिवासी विवाद पर सालखन मुर्मू ने दिया झारखंड सरकार के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो का जवाब

Jagran NewsPublication date: Fri 14 Oct 2022 14:39 (IST)Date Updated: Fri, Oct 14, 2022 2:39 PM (IST)

-आदिवासी विवाद पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता व झारखंड सरकार के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो के सवालाें का आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मयूरभंज (ओडिशा) के पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ने जवाब दिया है।

जगरनाथ महतो ने केंद्र सरकार से पूछा है कि बिना किसी पत्र या गजट के कुर्मी (कुड़मी) को क्यों 1931 में एसटी की सूची से बाहर किया गया है? यदि कुर्मी एसटी नहीं हैं तो उनकी जमीन सीएनटी (छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट) में कैसे है? इस पर सालखन ने कहा कि मंत्री जगरनाथ महतो को ज्ञात होना चाहिए कि सीएनटी कानून की धारा 46 (बी) के तहत एससी और ओबीसी के भी जमीन की रक्षा के लिए सीएनटी में प्रावधान है। इसे 2010 में झारखंड सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और उपमुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व सुदेश महतो ने तोड़ने का काम किया था। खिलाफ मैं (सालखन मुर्मू) झारखंड हाई कोर्ट में चार दिसंबर 2010 को मुकदमा दायर करके उसको बचाया था। झारखंड हाई कोर्ट ने 25 जनवरी 2012 को हमारे पक्ष में फैसला सुनाया था कि एससी और ओबीसी की जमीन का हस्तांतरण उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) की अनुमति से जिले के भीतर ही संभव है। हो।

1931 एसटी में शामिल नहीं थे कुड़मी

सालखन कहते हैं कि जगरनाथ महतो का दावा कि हम 1950 के पहले तक एसटी में शामिल थे, दमदार नहीं लगता है। क्योंकि 1931 की जनगणना में भी अंग्रेजों द्वारा जारी सेंसस ऑफ़ इंडिया- 1931 वोल्यूम-7, बिहार एंड उड़ीसा, पार्ट वन रिपोर्ट द्वारा डब्लू जी लेसी में इंपीरियल टेबल 18 और 17 में इनका नाम नहीं है। उसी प्रकार बंगाल डिस्ट्रिक्ट गैजेटियर – संताल परगना द्वारा एस एस ओ मोलली-1910 के प्रकाशित सेंसस आफ 1901 में भी इनका जिक्र हिंदू के साथ कालम ‘बी’ में कृषक जाति के रूप में दर्ज है। एबोरिजिनस के रूप में संताल परगना में केवल संताल, सौरिया पहाड़िया और माल पहाड़िया का नाम दर्ज है। कुरमी-महतो का पुराना दावा कि हम 1913 में एसटी थे, भी संदेहास्पद है। चूंकि 2 मई 1913 के आर्डर नंबर 550 का संबंध इंडियन सक्सेशन एक्ट-1865 से है, ना कि यह शिड्यूल ट्राइब (एसटी) चिह्नित करने से संबंधित है।

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झारखंड के कुर्मी में कोई अंतर नहीं

डब्ल्यू जी लेसी, आई सी एस द्वारा सेंसस आफ इंडिया-1931 के अपेंडिक्स-5 में वर्णित “छोटानागपुर के कुर्मी” के पेज 293 और पेज 294 में लिखा है कि आल इंडिया कुर्मी क्षत्रिय कान्फ्रेंस, जो मुजफ्फरपुर, बिहार में 1929 को हुआ था, के कुर्मी महतो भी शामिल हुए थे। वहां फैसला लिया गया कि छोटानागपुर के कुर्मी और बिहार के कुर्मी के बीच में कोई भी अंतर नहीं है। उसी प्रकार उसी साल 1929 में एक विशाल जनसभा मानभूम जिले के घगोरजुड़ी में हुई थी, जहां यूनाइटेड प्रोविंस, , उत्तर प्रदेश और बिहार के कुर्मी बड़ी संख्या जुटे और उसी फैसले को दोहराया कि हम सब एक हैं और हमारे बीच में रोटी संबंध ️ 1931 आल इंडिया कुर्मी क्षत्रिय महासभा की बैठक बंगाल के मानभूम जिले में हुई। इसी बात को दोहराया गया। वहां अनेक कुर्मी प्रतिनिधियों ने जनेऊ या पोईता भी धारण किया और हिंदू धर्म संस्कृति को अपनाने का फैसला लिया और अपने आप को ऊंची जाति होने का दंभ भी भरा। जगरनाथ महतो का दावा तथ्यों से प्रमाणित नहीं होता है। दूसरी बात 1950 में संविधान लागू होने के बाद ही एसटी-एससी आदि की सूची बनी है। ऐसी कोई सूची नहीं थी। कुरमी जाति को 1931 की सूची से हटाना जैसी बात भ्रामक है, गलत है।

से भी सवाल

झामुमो के मंत्री जगरनाथ महतो जब कुर्मी (कुड़मी) हित में केंद्र को सवाल पूछ सकता है तो आदिवासी हित सेंगेल भी गुरुजी शिबू सोरेन, हेमंत सोरेन, चंपई सोरेन और झामुमो के तमाम आदिवासी सांसद, विधायकों से सवाल पूछता है कि आपलोग आदिवासी समाज के हैं या केवल वोट के लालच में कुरमी को एसटी बनाकर असली आदिवासी फांसी के फंदे में लटकाना चाहते हैं? कुर्मी-महतो को एसटी बनाने के सवाल पर आपका स्टैंड नहीं बदलेगा तो यह स्वतः प्रमाणित हो जाता है कि आप और जेएमएम के सभी आदिवासी नेता, कार्यकर्ता और समर्थक आदिवासी विरोधी हैं। नरसंहार का रास्ता और मौत का कुआं खुद बना रहे हैं। आदिवासी सेंगेल अभियान आपको और आपकी पार्टी को झारखंड और वृहद झारखंड क्षेत्र में सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन को तीव्र और व्यापक बनाकर जरूर बेनकाब करेगी। क्योंकि जेएमएम पार्टी ने आठ फरवरी 2018 को हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झामुमो के सभी सांसद और विधायकों के हस्ताक्षर सहित कुर्मी को एसटी बनाने का ज्ञापन पत्र तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास झारखंड को दिया था। उसी प्रकार चार फरवरी 2022 को झारखंड दिवस के अवसर पर धनबाद गोल्फ मैदान में जनसभा करके गुरुजी शिबू सोरेन द्वारा भी यह घोषित करना कि कुर्मी महतो को आदिवासी बनाना है, दुर्भाग्यपूर्ण है। ️ घोर निंदा और विरोध करता है। सेंगेल अभियान को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भरोसा है। आदिवासियों की रक्षार्थ और सरना धर्म कोड की मान्यता के सवाल पर दोनों का सहयोग लेने पर संघर्षरत है।

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Edited by: Uttamnath Pathak

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