Friday, September 30, 2022
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इतिहास बना राजपथ, कर्तव्यपथ से PM मोदी बोले- आज हमारे पथ अपने, प्रतीक अपने – PM Narendra Modi Inaugurates Kartavya Path Netaji Statue At Revamped India Gate Ntc

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज उस ऐतिहासिक पल के साक्षी रहे, जब ‘राजपथ’ का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ कर दिया गया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि गुलामी का प्रतीक किंग्सवे यानी ‘राजपथ’, आज से इतिहास की बात हो गया है, ये हमेशा के लिए मिट गया है. आज ‘कर्तव्य पथ’ के रूप में नए का सृजन हुआ है.

के साथ उन्होंने इंडिया गेट के पीछे की बनी छतरी के नीचे नेताजी सुभाष बोस की 28 फीट ऊंची प्रतिमा का भी अनावरण किया. रंग के ग्रेनाइट पत्थर से बनी नेताजी ये प्रतिमा, उस जगह है जहां 23 जनवरी 2022 को उनकी होलोग्राम प्रतिमा लगाई गई थी. इस जगह पर 1939 में ब्रिटेन के महाराजा किंग जॉर्ज पंचम एक मार्बल की मूर्ति लगाई गई थी. बाद उसे इस जगह से हटा दिया गया था.

पहचान से मिली मुक्ति

मौके पर पीएम मोदी कहा कि आजादी के अमृतकाल में, आज एक नई प्रेरणा मिली है, नई ऊर्जा मिली है. गुजरे हुए कल को छोड़कर, आने वाले कल की नए रंग भर रहे हैं. गुलामी की एक और पहचान से मुक्ति मिली है. इंडिया गेट के समीप हमारे राष्ट्रनायक नेताजी सुभाषचंद्र बोस की विशाल मूर्ति स्थापित हुई है. के समय यहां ब्रिटिश राजसत्ता प्रतिनिधि की लगी हुई थी. ने उसी स्थान पर नेताजी की मूर्ति की स्थापना करके आधुनिक, भारत की प्राण प्रतिष्ठा भी कर दी है.

‘आत्मा’

ने कहा कि राजपथ राज के लिए था, लिए भारत के लोग गुलाम थे. भावना भी गुलामी का प्रतीक थी, संरचना भी गुलामी का प्रतीक थी. इसका आर्किटेक्चर भी बदला है, आत्मा भी है.

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नाम अब कर्तव्य पथ कर दिया गया है. के साथ यहां कैनाल का सिरे से किया गया है. का किया है. पूरे रास्ते और फुटपाथ को स्वरूप प्रदान किया है. कर्तव्यपथ पर नई लाइटिंग और नए हरे-भरे बागों का विकास किया गया है.

विचारों को किया गया नजरअंदाज

मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस की विरासत सही से संवारने के लिए निशाना भी साधा. कहा कि सुभाषचंद्र बोस ऐसे महामानव थे, जो पद और संसाधनों की चुनौती से परे थे. था, . विचार थे, . की थी, . के बाद हमारा भारत सुभाष बाबू की राह पर चला तो आज देश कितनी ऊंचाइयों पर होता. से, बाद हमारे इस महानायक भुला गया. को, प्रतीकों तक को नजरअंदाज कर गया. वक्त उन्होंने कल्पना की थी कि लाल किले पर तिरंगा फहराने की क्या अनुभूति होगी. भारत के पहले प्रधान थे, जिन्होंने 1947 से भी पहले को आजाद तिरंगा फहराया था.

पथ अपने, अपने

पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आज भारत के आदर्श अपने हैं, आयाम अपने हैं. के संकल्प हैं, हैं. पथ हैं, हैं. राजपथ का अस्तित्व होकर आज कर्तव्य पथ बना है पंचम की हटाकर नेताजी , ये गुलामी की के परित्याग का पहला उदाहरण नहीं है. आज देश में अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे सैकड़ों क़ानून बदल चुके हैं. बजट, इतने दशकों से ब्रिटिश संसद के समय का अनुसरण कर रहा , उसका समय और तारीख भी बदली गई है. शिक्षा नीति के जरिए अब विदेशी भाषा की मजबूरी से भी के युवाओं को आजाद किया जा रहा है.

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कर्तव्य पथ केवल ईंट-पत्थरों का रास्ता भर नहीं

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि ‘कर्तव्य पथ’ केवल ईंट-पत्थरों का रास्ता भर नहीं है. भारत के लोकतान्त्रिक अतीत और आदर्शों का जीवंत है. यहां जब देश के लोग आएंगे, तो नेताजी की प्रतिमा, नेशनल वार मेमोरियल, ये सब उन्हें कितनी बड़ी प्रेरणा देंगे, उन्हें कर्तव्य बोध से ओत-प्रोत करेंगे.

का सम्मान

नरेन्द्र मोदी ने इस मौके पर उन श्रमिकों का भी आभार व्यक्त किया राजपथ को कर्तव्य पथ बनाने में अपना योगदान दिया. मोदी ने मैं अपने उन साथियों का विशेष आभार व्यक्त हूं, कर्तव्य ही नहीं है, बल्कि अपने श्रम की से देश को कर्तव्य पथ है. के हर एक नागरिक का आह्वान करता हूं, आप सभी को आमंत्रण देता हूं कि इस नवनिर्मित पथ को आकर देखिए.

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