Tuesday, September 27, 2022
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आखिर क्यों बढ़ रही है ‘निजी कर्ज’ की रफ्तार? अर्थव्यवस्था के लिए क्या इसके मायने – cost of living soars as inflation jumps spikes in credit growth personal loan tuta

दर और महंगाई के पर्सनल लोन की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है. में रोजगार संकट और बढ़ते स्वास्थ्य खर्चे के बीच से आगे निकल गई. के आंकड़े बताते हैं कि इस अंतराल को भरने के लिए ने धड़ल्ले से पर्सनल लोन लेना शुरू कर दिया है.

परिवार का खर्च कमाई से ज्यादा होने से लोगों ने पहले बचत को निकालकर खर्च करना शुरू किया, जिसमें सावधि जमाओं (Fixed Deposits) और सोने को गिरवी रखकर लोन लेने का चलन बढ़ा. का कहर कम होने के साथ बकाया क्रेडिट कार्ड में उछाल आने लगी है. मतलब है कि लोग ज्यादा महंगे दर वाले लोन भी ज्यादा उठाने लगे हैं.

Why it matters
का मानना ​​​​ कि कर्ज अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ता है. दौर थोड़ी अवधि में तो सही है लेकिन इसका में बुरा असर पड़ता है. के बाद ऐसे अवस्था आ सकती है, लोग ब्याज चुकाने में असमर्थ होने लगे.

कहते आंकड़े आंकड़े
रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक भारत में बैंको से लिया गया कुल निजी कर्ज को पार कर गया है. ऐसे समय में हुआ है जब रिजर्व बैंक महंगाई रोकने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी करना शुरू कर दिया था. महीने में महंगाई दर 7 फीसदी से ऊपर थी. में महंगाई दर 6.71 रही. जुलाई 2022 लगातार सातवां ऐसा महीना रहा, जब महंगाई दर रिजर्व बैंक के लेवल से ऊपर है.

पिछले दो साल में पर्सनल लोन में 10 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है. जून-2022 में Personal loan 18 फीसदी की दर से बढ़ा (YoY), जो कि कोरोना महामारी के शुरुआती दिनों यानी जुलाई 2020 के मुकाबले दोगुना (9 फीसदी) है.

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की बढ़ोतरी तकरीबन हर क्षेत्र में हुई है. बढ़ाने में सबसे ज्यादा योगदान आवास, और क्रेडिट कार्ड का रहा है. -2020 से लेकर जून-2022 के बीच 4 लाख करोड़ रुपये का आवासीय कर्ज लिया गया. जबकि वाहन के लिए 2 लाख करोड़ रुपये और क्रेडिट कार्ड के जरिए 515 अरब रुपये का लोन लिया गया है.

बढ़ते निजी लोन से दो सवाल खड़े होते हैं, एक तो इतनी तेज से इन कर्जों के बढ़ने वजह क्या है और आगे इसका असर क्या होगा? की जनसंख्या के बड़े हिस्से की वास्तविक इनकम या तो जस की तस है या फिर हुई है खासकर महामारी के बीच. स्तर पहले जैसा बनाए रखने के लिए लोगों ने नौकरी के दूसरे वित्तीय स्रोतों पर भरोसा शुरू कर दिया.

का बढ़ना अच्छा है या खराब?
कर्ज अगर अर्थव्यवस्था को बढ़ाता है और निवेश की तरह काम करता है तो इसे एक बेहतर संकेत माना जाता है. लेकिन लंबे समय तक कर्ज के बढ़ते रहने से लोग धीरे शुरू कर देते हैं, जिससे मंदी की आशंका गहराने लगती है. घरेलू कर्ज का स्तर अलार्मिंग स्तर पर नहीं है. के दो साल के भी कर्जों में बढ़ोतरी बहुत बेहतर संकेत नहीं है.

तस्वीर
में बढ़ोतरी केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई में दिख रही है. चालू साल के दूसरी तिमाही में अमेरिका में घरेलू कर्ज 1200 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है. बढ़ने से ऐसा है. न्यूयॉर्क फेडरल बैंक के मुताबिक क्रेडिट कार्ड में 13 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी हुई है, जो कि पिछले 20 साल में सबसे ज्यादा है.

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की रिसर्च रिपोर्ट के कर्ज में बढ़ोतरी की खास वजह कोरोना महामारी है. जिसकी वजह से घरेलू कर्ज और GDP के अनुपात में तेजी आई है. 2020 के मुकाबले 2021 में घरेलू कर्ज 32.5 फीसदी से बढ़कर 37.3 फीसदी हुई. हालांकि बैंक की रिपोर्ट कहती है कि 2022 के पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद बढ़ेगा और यह दर 34 फीसदी पर आ सकता है. का कहना है कि रकम के हिसाब से घरेलू कर्जों में बढ़ोतरी होगी.

भर के रिजर्व बैंकों के संगठन बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट के अल्पअवधि में घरेलू कर्ज उपभोग और जीडीपी को बढ़ाता है. लेकिन लंबे समय में अगर यह जीडीपी का 60 फीसदी पहुंच जाता है तो चुनौती बढ़ जाती है. के हिसाब से भारत बढ़ते निजी कर्ज से फिलहाल कोई जोखिम नहीं है. इसके लगातार बढ़ने और अर्थव्यवस्था में ठहराव जैसी आशंका के संकेत बीच इसपर नजर रखना जरूरी है.

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