Wednesday, October 5, 2022
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अमित शाह के सीमांचल दौरे से बेचैन क्यों दिख रहे हैं नीतीश कुमार

: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खिलाफ विपक्ष को लामबंद करने की कोशिश में जुटे बिहार के सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने इशारों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) के बिहार के चिकन नेक कहे जाने वाले सीमांचल दौरे पर निशाना साधा I नेताओं के साथ बैठकी के बाद से ही नीतीश काफी उत्साहित हैं और जब भी मौका मिल रहा है वे अपने पुराने सहयोगी को खूब झाड़ रहे हैं। नीतीश ने बिना नाम लिए कहा कि ये तो कोशिश में लगे ही रहते हैं कि अलग-अलग धर्मों के बीच कुछ हो जाए। हालांकि, किसी मंत्री के किसी इलाके के दौरे करने को नीतीश कैसे अलग चश्मे से देख रहे हैं ये समझ से परे है। क्योंकि नीतीश ने ही कभी पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modes) के लिए कहा था कि देश को ऐसा पीएम चाहिए जो जिसे टोपी भी पहननी होगी तिलक तिलक भी लगाना होगा। क्या किसी केंद्रीय मंत्री के दौरे को धर्म की चासनी में लपेट नीतीश कुछ और दांव चल रहे हैं?

नीतीश ने कहा क्या

दौरे से लौटे नीतीश जब मीडिया के सामने आए तो उनपर सवालों की बौछार शुरू हो गई। अमित शाह के सीमांचल दौरे पर सवाल हुए। इसपर नीतीश ने धड़धड़ाते हुए कहा, ‘ये तो कोशिश में लगे ही न रहते हैं कि अलग-अलग धर्मों के बीच कुछ हो जाए। . आपस में कभी भी हिंदू हो मुस्लिम हो या किसी संप्रदाय के लोग हों किसी तरह का आपसी विवाद नहीं होना चाहिए।’ यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि ये तो चाहते हैं कि झंझट करा दो ताकि हिंदुओं के मन में एक बात आ जाए और राज करने की बात हो। उसी तरह से लगे हैं, जगह से। कुछ नहीं है देश एक और इसमें रहने वाले सारे लोग देश के हैं चाहे वो हिंदू हों या मुसलमान हों।

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शाह के दौरे से नीतीश क्यों बेचैन
अमित शाह 23 सितंबर को दो दिन के दौरे पर बिहार आ रहे हैं। वह पूर्णिया और किशनगंज जिलों का दौरा करेंगे। शाह 23 सितंबर को पूर्णिया में एक आमसभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद वह पूर्णिया और आसपास के जिलों और मंडलों के पदाधिकारियों के साथ आयोजित की गई बैठक में शामिल होंगे। अगले दिन यानी 24 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री की सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक होगी, जिसमें वह सीमांचल के हालात को समझने की कोशिश करेंगे। 24 सितंबर को ही शाम में किशनगंज जिला के मंडल और जिला पदाधिकारियों के साथ आयोजित बैठक कर क्षेत्र की समस्याओं को सुनेंगे। दरअसल, बीजेपी सीमांचल इलाके के किशनगंज, पूर्णिया, अररिया और कटिहार की डेमोग्राफी बदलने का आरोप लगाती रही है। का कहना है कि यहां रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुसलमानों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। के इस दौरे के बाद भगवा दल वोटों की गोलबंदी की कोशिश करेगी।
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वोट बैंक वाला दांव?

अब जबकि नीतीश ने अपने बयान में साफ कहा कि देश में रहने वाले सारे लोग देश के हैं। वह वोट बैंक वाला दांव चल गए। बीजेपी जब नीतीश कुमार के साथ सत्ता में थी तब से सीमांचल इलाके में अवैध घुसपैठ का मुद्दा उठाती रही है। नीतीश ने अपने बयान से बीजेपी के आरोप पर पानी डालने की कोशिश की है। और आरजेडी के एक होने के बाद सीमांचल इलाके में मुस्लिम वोट बैंक को साधने की कोशिश नीतीश ने कर ली है।

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टोपी वाली बात भी समझिए
2011 में गुजरात में एक सामाजिक सद्भावना कार्यक्रम शुरू किया था तब राज्य के तत्कालीन सीएम रहे नरेंद्र मोदी ने इस कार्यक्रम मेंहदी हसन की टोपी पहनने से इनकार कर दिया था। घटना के बाद जब मोदी को बीजेपी ने 2013 में पीएम पद का उम्मीद्वार घोषित किया था तो नीतीश कुमार ने उन्हें नसीहत दी थी। उन्होंने कहा था कि सत्ता के लिए टोपी भी पहननी होगी और टीका भी लगाना होगा।
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जरिए मोदी पर निशाना?
नेताओं के साथ बैठक को नीतीश विरोधी दलों को एकसाथ लाने का जरिया बता रहे हैं। वह बातों में बातों में पीएम नरेंद्र मोदी पर परोक्ष तौर पर निशाना भी साधते हैं। लिए वह दिवंगत पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के कामों का जिक्र करते हैं। कहा कि अटल जी के नेतृत्व में हमने कितना काम किए। क्यों नहीं कुछ काम किए। का राज था तो खूब काम हुआ है। किसी के मन में विकास नहीं है और कुछ अन्य बातों के लिए सोचेंगे तो भाई हमलोग तो लोगों के साथ हैं। कि नीतीश अटल मंत्रिमंडल में केंद्रीय मंत्री रहे थे। उन्होंने अटल का जिक्र कर बिना नाम लिए पीएम मोदी पर भी निशाना साधा।

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