Friday, September 30, 2022
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अगर लड़के स्कूल में धोती पहनना चाहें, तो पहननें दें? हिजाब बैन मामले में SC की टिप्प्णी – Karnataka hijab ban case supreme court hearing know what happen in courtroom ntc

कोर्ट में दो जजों की एक बेंच कर्नाटक हाईकोर्ट एक फैसले खिलाफ अहम मामले की सुनवाई कर रही है. ये मामला स्कूल यूनिफॉर्म के मुस्लिम लड़कियों द्वारा सिर पर पहने जाने वाले एक ‘स्कार्फ पर पाबंदी’ (आम शब्दों में हिजाब बैन) से जुड़ा है. मामले की सुनवाई जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच कर रही है. तो वहीं अलग-अलग याचिका दाखिल करने वाले वकील अपनी दलीलें पेश कर रहे हैं. इन्हीं वकीलों में से एक देवदत्त कामत ने जब हिजाब को ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ का हिस्सा बताया, तो बेंच में शामिल जस्टिस गुप्ता ने पूछा-अगर कोई सलवार कमीज पहनना चाहता है या लड़के धोती पहनना चाहते हैं, तो क्या इसकी भी अनुमति दे दी ? क्या हुआ कोर्ट में, जज के सवाल और वकील की दलील क्या-क्या रहीं…

देवदत्त कामत ने कोर्ट के सामने बुनियादी अधिकार का सवाल रखते हुए कहा- संविधान का अनुच्छेद 19 (1) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है. क्या पहनना है, भी सुनिश्चित है. इस पर जस्टिस गुप्ता ने कामत से पूछा कि अभी आप Right to undress की बात कर रहे हैं, तो बाद में आप Right to undress की बात भी करेंगे, ये जटिल सवाल है. अदालत ने आगे पूछा कि कोई सलवार कमीज पहनना चाहता है, लड़के धोती पहनना चाहते हैं, तो क्या इसकी अनुमति दे दी जाएगी.

सरकार अनुच्छेद-19 के अधिकार देने में विफल रही ?

इससे पहले कामत ने कोर्ट में दलील दी कि यहां सवाल ये है कि क्या सरकार -19, 25 और 26 के तहत छात्रों को उनके उपयुक्त अधिकार देने में विफल रही है? यहां यूनिफॉर्म को चुनौती नहीं दे रहे और ना ही ये कह रहे कि कोई यूनिफॉर्म की जगह जींस या कोई अन्य कपड़ा पहन ले? दलील ये है कि अगर कोई छात्र स्कूल की यूनिफॉर्म पहनता है और तो क्या सरकार उन्हें अपने सिर पर स्कॉर्फ बांधने से रोक सकती है? ऐसे हिजाब या जिलबाब की बात नहीं हो रही है जो सिर से पांव तक उन्हें कवर करता हो? बात कर रहे एक ऐसे स्कार्फ की स्कूल यूनिफॉर्म से मैच करता हो, क्या उससे किसी की भावना आहत सकती है छात्र यूनिफॉम नेशनल को पहुंचा सकती है?

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ने माना समायोजन का सिद्धांत

दलीलें पेश करते हुए वकील देवदत्त कामत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई फैसलों में उचित समायोजन के सिद्धांत को स्वीकार किया है. कोर्ट रूम में काले कपड़े से सिर ढांके हुए एक महिला एडवोकेट करते कहा कि अब किसी को क्या दिक्कत हो सकती है! कोर्ट को कोई दिक्कत हो रही है?

छोड़ने होंगे अपने मौलिक अधिकार?

क्या हमारी संवैधानिक व्यवस्था में एक छात्र या छात्रा से यह अपेक्षा की जाती है कि वह शिक्षा प्राप्त करने के लिए अनुच्छेद 19, 21 और 25 के तहत अपने मौलिक अधिकारों को छोड़ दे? कामत ने कहा कि केंद्रीय विद्यालयों में भी छात्राओं को हिजाब पहनने की छूट है. छात्राएं स्कूल यूनिफॉर्म से मैच हुआ हिजाब पहन हैं. दलील कर्नाटक हाईकोर्ट में भी दी थी. हाई कोर्ट ने ये कहते हुए दलील खारिज कर दी कि विद्यालयों का मसला राज्य सरकार के स्कूलों से अलग है.

इंडिया आइए आइए

अफ्रीका में कोर्ट के एक फैसले का जिक्र करते हुए कामत ने कहा कि केरल की एक छात्रा स्कूल में ड्रेस के साथ नथनी पहनना चाहती थी। यही उठा. कोर्ट ने फैसला दिया कि नोज रिंग यानी नथनी पहनना भले धार्मिक मान्यता का न हो, पहचान से जुड़ा है. की अदालत ने उसे मंजूरी दी. कहा कि संसद के उच्च सदन में स्कूल लड़कियों के और स्कार्फ पहनने का मसला गई वो सिर से पांच तक व्यक्ति कवर करता .

इस पर कोर्ट ने कहा-यहां बहस इस बात पर हो रही है कि को ‘युक्तिसंगत छूट’ दी जा सकती है या नहीं. इस पर कामत ने कहा कि ये एक ‘बड़ा कानूनी मसला’ है इसलिए इसे 5 जजों वाली संवैधानिक बेंच पर ट्रांसफर कर देना चाहिए?

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वकील देवदत्त कामत में जब , ब्रिटेन और अन्य देशों की अदालतों का उदाहरण दे रहे थे, तब जस्टिस गुप्ता ने उनसे हल्के अंदाज में – इंडिया लौट आइए. जस्टिस सुधांशु धूलिया ने सवाल किया-क्या आपने वहां के संविधान को पढ़ा है? विश्वास . पर कामत ने कहा कि इस बारे मैंने पढ़ा हैं. दस्तवेज पास. जस्टिस गुप्ता ने कहा- देश का अपना संविधान, कानून और नियम होते हैं. के संविधान का पालन नहीं कर सकते. इस पर कामत ने कहा-अच्छी चीजों का हमेशा स्वागत होना चाहिए.

तुलना जेल से कैसे कर सकते हैं?

देवदत्त कामत ने अपनी दलीलों के दौरान कर्नाटक हाइकोर्ट की टिप्पणियों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट का आदेश कहता है कि आप किसी लड़की को के फोर्स नहीं कर सकते, ये समानता के अधिकार के खिलाफ है. लेकिन यहां कोई किसी लड़की से जोर-जबरदस्ती नहीं कर रहा है. लड़की हिजाब पहनना चाहती तो क्या सरकार उसे रोक सकती है. पर जस्टिस गुप्ता ने कहा कि कोई लड़कियों को हिजाब पहनने मना नहीं कर रहा. इसे स्कूल में पहनने की बात है.

कहा कि इस मामले स्कूल कमेटी को निर्णय लेने दिया जाय. ऐसे आदेश जारी कर खास समुदाय को टारगेट कर रही है. अगर कोई संध्या वंदन, रुद्राक्ष, यज्ञोपवीत, कलावा पहन कर स्कूल है तो किसे आपत्ति है? ने कहा कि रुद्राक्ष, बाहर से दिखते. कोई नहीं है.

ने कहा कि हम इस मुद्दे को अटपटे तर्कों के किसी निर्णय तक नहीं ले जा सकते. इस तरह लंबी जिरह के बाद मामले की सुनवाई को कल सुबह 11.30 तक के लिए टाल दिया है. पर कल गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी.

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